जयपुर में रविवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए। पायलट ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी लोकतांत्रिक संस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं।
पायलट ने कहा कि चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं और महत्वपूर्ण फैसले नियमों के मुताबिक लिए जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR से जुड़े कई फैसलों में दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी।
मतदाता सूची को लेकर पायलट ने दावा किया कि SIR के दौरान देशभर में करीब 13 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से हटाए गए। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह आंकड़ा ड्राफ्ट रोल से हटाए गए नामों का है और इसका मतलब यह नहीं है कि सभी हटाए गए मतदाता गलत तरीके से बाहर किए गए थे। चुनाव आयोग ने SIR पूरी हो चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया है।
पायलट ने बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए मतदाता अधिकारों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वोट नागरिक का महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार है और यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटता है तो इससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
इसी मुद्दे पर पायलट ने कहा, “पहले नोटबंदी और अब वोटबंदी”, और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाई। चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग का कहना है कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाना है और छूटे हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा शामिल करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।



