Rajasthan News: राजस्थान में कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार अब बीज कंपनियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन, कॉन्टैक्टलेस और फेसलेस बनाने जा रही है. नई व्यवस्था ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होगी, जिससे बीज किस्मों के पंजीकरण में पारदर्शिता, गति और विश्वसनीयता बढ़ेगी.
कृषि विभाग इस परियोजना को सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, आईआईटी कानपुर के आईटी विशेषज्ञों और राज किसान साथी टीम के सहयोग से विकसित कर रहा है. प्रस्तावित मॉड्यूल के जरिए बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को कृषि विभाग के कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी. वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन ही नई विकसित बीज किस्मों का पंजीकरण करा सकेंगे.
पारदर्शी होगी पूरी प्रक्रिया
नई प्रणाली कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन केंद्रीय बीज समिति और राज्य बीज उपसमिति की परिचालन मार्गदर्शिका के अनुरूप तैयार की जा रही है. इससे बीज कंपनियों के लिए उन्नत किस्मों का पंजीकरण आसान होगा और विभाग का समय तथा श्रम दोनों बचेंगे.
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक उपज देने वाली नई बीज किस्मों का विकास और पंजीकरण तेज होगा, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा. उन्हें समय पर बेहतर गुणवत्ता वाले उन्नत बीज उचित दरों पर उपलब्ध हो सकेंगे.
मॉड्यूल का प्रस्तुतीकरण
इस संबंध में बुधवार को कृषि आयुक्तालय में एक दिवसीय बीज किस्म पंजीकरण आमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई. इसमें ब्लॉकचेन आधारित नए ऑनलाइन मॉड्यूल का प्रस्तुतीकरण किया गया. कार्यशाला में नेशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया, राजस्थान राज्य प्रमाणित बीज उत्पादक एसोसिएशन (श्रीगंगानगर), राजस्थान एग्रीकल्चर इनपुट डीलर्स एसोसिएशन (जयपुर), हाड़ोती बीज उत्पादक एसोसिएशन (कोटा), राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों, काजरी जोधपुर, बीज प्रमाणीकरण संस्था, राजस्थान बीज निगम, बीज प्रयोगशालाओं, उद्यान विभाग, विभिन्न बहुराष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित कुल 117 बीज विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने नए मॉड्यूल की सराहना की.
अगस्त से लागू करने की तैयारी
कृषि विभाग के अनुसार, इस नए ऑनलाइन मॉड्यूल को अगस्त माह से लागू करने का प्रस्ताव है. इसके लागू होने के बाद उन्नत बीजों का विकास सरकारी अनुसंधान फार्मों और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से पंजीकृत बीज अनुसंधान एवं विकास केंद्रों में वैज्ञानिकों की निगरानी में किया जाएगा.
इसके बाद राज्य स्तरीय बीज उपसमिति नई बीज किस्मों को राज्य के लिए अनुशंसित कर केंद्रीय बीज समिति को भेजेगी, ताकि उन्हें गजट में अधिसूचित किया जा सके. इससे राजस्थान के किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली नई बीज किस्में समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.



