नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो को कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। Meta और भारत सरकार के बीच शुरू हुआ विवाद संसद की स्थायी समिति तक पहुंच गया है। समिति ने Meta के CEO मार्क जकरबर्ग से तीन दिन के भीतर व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद जुलाई के आखिर में शुरू हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक पर कुछ समय के लिए दिखाई देना बंद हो गया था। इस वीडियो में प्रधानमंत्री छात्रों और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बात कर रहे थे। कुछ समय बाद Meta ने वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया और इसे तकनीकी गलती बताया। कंपनी की ओर से इस मामले में खेद भी जताया गया, लेकिन सरकार इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखी।
संसदीय समिति ने मांगा जकरबर्ग से जवाब
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि केवल कंपनी की ओर से दिया गया सामान्य माफीनामा पर्याप्त नहीं है। समिति का कहना है कि Meta के CEO मार्क जकरबर्ग को खुद सामने आकर इस घटना के लिए माफी मांगनी चाहिए। इसके लिए उन्हें तीन दिन का समय दिया गया है।
सेफ हार्बर सुरक्षा पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर हो रही है। इस प्रावधान के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की पोस्ट के लिए कंपनियों को कुछ कानूनी सुरक्षा मिलती है, बशर्ते वे कानूनों का पालन कर रही हों। संसदीय समिति ने संकेत दिए हैं कि अगर Meta इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं देता है तो कंपनी को मिलने वाली इस सुरक्षा की समीक्षा की सिफारिश की जा सकती है। हालांकि अभी तक सेफ हार्बर खत्म करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है।
MeitY ने भी Meta अधिकारियों को किया तलब
इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भी Meta के अधिकारियों को बुलाकर जवाब मांगा था। सरकार यह जानना चाहती है कि प्रधानमंत्री का वीडियो आखिर किस वजह से हटाया गया और कंपनी के कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में यह गलती कैसे हुई। सरकार की ओर से Meta के एल्गोरिद्म, कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया और वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
Meta ने बताया तकनीकी गलती
Meta का कहना है कि वीडियो किसी नीति उल्लंघन के कारण नहीं हटाया गया था। कंपनी के अनुसार यह एक तकनीकी समस्या थी और जानकारी मिलते ही वीडियो बहाल कर दिया गया। हालांकि, सरकार और संसदीय समिति इस मामले में ज्यादा स्पष्ट जवाब चाहती है। मामला प्रधानमंत्री के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से जुड़ा होने के कारण इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर Meta के अगले जवाब और मार्क जकरबर्ग की प्रतिक्रिया पर है। अगर कंपनी की ओर से कोई नया बयान आता है या जकरबर्ग खुद इस मामले में सामने आते हैं, तो यह विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच सकता है। भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच कंटेंट मॉडरेशन, डेटा सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ा होने के कारण चर्चा में है।



