Tuesday, September 29, 2026
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बारिश अब उत्सव से बना मुसीबत, कब सुधरेगा ड्रेनेज सिस्टम?

राजस्थान में कभी बारिश का इंतजार उत्सव की तरह किया जाता था, लेकिन अब शहरों में कुछ घंटों की बारिश के बाद जलभराव, कीचड़, जाम और खराब सड़कों की समस्या सामने आ जाती है। जयपुर में सोमवार की बारिश ने एक बार फिर ड्रेनेज व्यवस्था और जलभराव से जुड़े सवाल खड़े कर दिए।

राजस्थान में कभी बारिश को बड़ा उत्सव माना जाता था। लोग बारिश के लिए यज्ञ तक कराते थे। अब हालात बदल चुके हैं, बादल के उमड़-घुमड़ करते ही लोगों के दिल बैठने लगते हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें बारिश से कोई एतराज है, असल में बारिश के बाद जमा कीचड़-पानी और अन्य तकलीफ उन्हें डराती  हैं। मानसून यूं तो चला गया पर सोमवार को हुई बारिश ने राजधानी जयपुर में व्याप्त बदइंतजामी को फिर सामने ला दिया है। असल में यह हालत अकेले जयपुर की नहीं, प्रदेश के अन्य बड़े शहर और कस्बों की भी है। जरा सी बारिश में जगह-जगह जलभराव, सड़कों का बह जाना, कीचड़ जमा होना और लोगों का निकलना बड़ी मुसीबत बन चुका है।

यहां कभी किसान बारिश का इंतजार करते थे और शहरों में लोग गर्मी से राहत मिलने पर खुश होते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। बारिश की कुछ घंटों की झड़ी ही जयपुर समेत प्रदेश के कई बड़े शहरों के लिए मुसीबत बन जाती है। सड़कें जलमग्न, नाले उफनते, रास्ते बंद, वाहन फंसते और घंटों जाम—मानो शहरों की व्यवस्था बारिश के सामने घुटने टेक देती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल यही कहानी दोहराए जाने के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं होता? बारिश आने से पहले नालों की सफाई, ड्रेनेज की क्षमता की समीक्षा, जलभराव वाले स्थानों की पहचान और कमजोर सड़कों की मरम्मत जैसे काम केवल कागजों तक क्यों सीमित रह जाते हैं? जब विभागों को मालूम है कि किन इलाकों में हर बारिश में पानी भरता है, तो वहां पहले से इंतजाम क्यों नहीं किए जाते?

जयपुर जैसे शहर में स्मार्ट सिटी, विकास और आधुनिक सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश उन दावों की असली परीक्षा लेती है। कई जगह सड़कें पानी के साथ बहने लगती हैं, कहीं गड्ढे जानलेवा हो जाते हैं और कहीं ड्रेनेज व्यवस्था इतनी कमजोर है कि बारिश का पानी घंटों तक सड़कों पर जमा रहता है। इसका खामियाजा आम आदमी भुगतता है—दफ्तर जाने वाला कर्मचारी, स्कूल जाने वाला बच्चा, मरीज को अस्पताल ले जाने वाला परिवार और रोज कमाने-खाने वाला व्यक्ति। बारिश को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बारिश के पानी से होने वाली अव्यवस्था को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए हर साल बारिश के बाद समीक्षा बैठक करने के बजाय बारिश से पहले ठोस तैयारी जरूरी है। शहरों में स्थायी ड्रेनेज प्लान, नालों की वैज्ञानिक सफाई, जलभराव वाले स्थानों का समाधान, सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी और पानी के प्राकृतिक बहाव के रास्तों को अतिक्रमण से मुक्त रखना होगा। सरकार को यह भी तय करना होगा कि जलभराव के लिए जिम्मेदारी किसकी है।

सबसे जरूरी है जलभराव वाले स्थानों की स्थायी सूची तैयार करना। जिन जगहों पर हर साल पानी भरता है, वहां पंप लगाकर पानी निकालना स्थायी समाधान नहीं है। वहां यह पता लगाना होगा कि पानी जमा क्यों होता है और उसके निकास का स्थायी रास्ता क्या है। सड़कों को लेकर भी गंभीरता जरूरी है। बार-बार सड़क बनाना और फिर पहली ही अच्छी बारिश में उसका उखड़ जाना केवल सरकारी धन की बर्बादी नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल है। सड़क निर्माण में गुणवत्ता की जिम्मेदारी तय हो और खराब सड़क बनने पर संबंधित एजेंसी तथा ठेकेदार की जवाबदेही सुनिश्चित हो।

एक ही स्थान पर हर साल पानी भरता है तो यह केवल मौसम की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक योजना और निगरानी की समस्या भी है। जिम्मेदारी तय होगी और अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा तभी व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। बारिश को आफत बताकर हाथ खड़े करना आसान है। सरकार और स्थानीय निकायों का काम मौसम को दोष देना नहीं, बल्कि उसके प्रभाव को कम करना है। जनता को हर साल यह उम्मीद रहती है कि इस बार व्यवस्था सुधरेगी। अब जरूरत उम्मीद की नहीं, पहले से किए गए इंतजाम की है। बारिश प्रकृति की देन है, लेकिन बारिश के बाद शहर का डूबना व्यवस्था की विफलता नहीं बनना चाहिए। सरकार को अब घोषणा और निरीक्षण से आगे बढ़कर स्थायी समाधान पर काम करना होगा, ताकि अगली बारिश में राजस्थान के शहरों में पानी राहत बने, मुसीबत नहीं।

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