जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने दीपावली के अवसर पर प्रदेश के सहकारी बैंकों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए 101.67 करोड़ रुपये का क्षतिपूर्ति ब्याज अनुदान जारी किया है। इस राशि का लाभ प्रदेश के सभी 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) को मिलेगा। सरकार की ओर से जारी यह अनुदान अल्पकालीन फसली ऋण वितरण पर मिलने वाले क्षतिपूर्ति ब्याज के रूप में दिया गया है। इससे सहकारी बैंकों को वित्तीय मजबूती मिलेगी और किसानों तक फसली ऋण पहुंचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
राजस्थान के सभी 29 सहकारी बैंकों को मिला अनुदान
राज्य सरकार ने बजट घोषणा 2025-26 के बिंदु संख्या 116 के तहत यह राशि जारी की है। अपेक्स बैंक के आदेश पर ट्रेजरी के माध्यम से सीधे प्रदेश के सभी 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के चालू खातों में पैसा जमा कराया गया है। इस अनुदान के तहत 1 अप्रैल 2025 से 31 अगस्त 2025 तक की अवधि के दावों का निस्तारण किया गया है।
पांच किस्तों में जारी हुए 101.67 करोड़ रुपये
सहकारी बैंकों को यह राशि कुल पांच किस्तों में जारी की गई है। इसमें चार किस्तों में 20-20 करोड़ रुपये और पांचवीं किस्त में 21.67 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इस तरह कुल 101.67 करोड़ रुपये की राशि प्रदेश के सहकारी बैंकों को उपलब्ध कराई गई है। अपेक्स बैंक की ओर से सभी 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को भुगतान संबंधी एडवाइजरी भी जारी की गई है।
किस जिले को कितना मिला अनुदान?
जारी अनुदान में बाड़मेर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक को सबसे अधिक 7.74 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं जयपुर को 7.12 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया गया है।
प्रमुख जिलों को मिली राशि इस प्रकार है:
- बाड़मेर: 7.74 करोड़ रुपये
- जयपुर: 7.12 करोड़ रुपये
- भीलवाड़ा: 5.37 करोड़ रुपये
- सीकर: 5.26 करोड़ रुपये
- चित्तौड़गढ़: 5.08 करोड़ रुपये
यह भुगतान सामान्य, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मद के तहत किया गया है।
किसानों को कैसे मिलेगा इस फैसले का फायदा?
राजस्थान में सहकारी बैंक किसानों को अल्पकालीन फसली ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बैंकों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति ब्याज अनुदान राशि उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगी। सरकार का उद्देश्य किसानों तक समय पर फसली ऋण पहुंचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इससे सहकारी बैंकों की ऋण वितरण क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।



