जयपुर। पोकरण एक बार फिर आधुनिक युद्ध तकनीक के बड़े परीक्षण का गवाह बनने जा रहा है। इस बार फोकस फाइटर जेट या मिसाइल सिस्टम के बजाय ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक पर रहेगा। भारतीय वायुसेना 14 से 16 सितंबर तक पोखरण रेंज में ‘IAF ड्रोनथॉन’ आयोजित करेगी। इसमें देश की घरेलू रक्षा कंपनियां, स्टार्टअप और इनोवेटर्स अपने मानवरहित हवाई सिस्टम यानी UAS और काउंटर-UAS की क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे।
रेगिस्तान में होगा ड्रोन का लाइव डेमो
ड्रोनथॉन में सिर्फ नए ड्रोन सिस्टम प्रदर्शित नहीं किए जाएंगे, बल्कि उनका लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी होगा। इसके जरिए अलग-अलग ड्रोन की परिचालन क्षमता और कॉम्बैट इफेक्टिवनेस को परखा जाएगा। वहीं काउंटर-ड्रोन सिस्टम की क्षमता का भी प्रदर्शन किया जाएगा। इन सिस्टम का उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन को डिटेक्ट, ट्रैक और न्यूट्रलाइज करना है। प्रदर्शन में जैमिंग और इंटरसेप्शन जैसी तकनीकों को भी शामिल किया जाएगा।
स्वदेशी कंपनियों और सेना के बीच बढ़ेगा तालमेल
IAF ड्रोनथॉन का एक अहम उद्देश्य भारतीय रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप और सेना की जरूरतों के बीच सीधा तालमेल बनाना है। इस आयोजन के जरिए वायुसेना को देश में विकसित हो रहे नए UAS और काउंटर-UAS सिस्टम की वास्तविक परिचालन क्षमता को समझने का मौका मिलेगा। वहीं घरेलू कंपनियों को अपनी तकनीक को सैन्य जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए फील्ड-लेवल फीडबैक मिल सकेगा।
स्वॉर्म टेक्नोलॉजी की भी होगी परीक्षा
ड्रोन वॉरफेयर में स्वॉर्म टेक्नोलॉजी को भविष्य की महत्वपूर्ण क्षमता माना जा रहा है। एक साथ बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, लक्ष्य पहचान और विभिन्न सैन्य अभियानों में किया जा सकता है। ड्रोनथॉन जैसे लाइव परीक्षणों के जरिए ऐसी तकनीकों की वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगिता और प्रभावशीलता को समझने पर जोर रहेगा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी ड्रोन वॉरफेयर की अहमियत
हालिया सैन्य अभियानों में ड्रोन, काउंटर-UAS और वन-वे अटैक ड्रोन के इस्तेमाल ने आधुनिक युद्ध में मानवरहित प्रणालियों की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी UAS और काउंटर-UAS प्रणालियों के इस्तेमाल ने भी ड्रोन वॉरफेयर की बढ़ती भूमिका को सामने रखा। ऐसे में पोखरण में होने वाला ड्रोनथॉन भारतीय वायुसेना की भविष्य की ड्रोन क्षमता और स्वदेशी तकनीक के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है।
ISR मिशन में लंबे समय से हो रहा ड्रोन का इस्तेमाल
भारतीय वायुसेना पिछले कई वर्षों से मानवरहित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल निगरानी और टोही अभियानों के लिए करती रही है। 2023 में वायुसेना ने बताया था कि रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट का बड़े स्तर पर Intelligence, Surveillance and Reconnaissance (ISR) मिशनों में इस्तेमाल किया जा रहा है। अब बदलते युद्धक्षेत्र में निगरानी के साथ-साथ ड्रोन की आक्रामक और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं पर भी जोर बढ़ रहा है। पोकरण ड्रोनथॉन इसी बदलती जरूरत का एक महत्वपूर्ण परीक्षण होगा।



