Saturday, September 12, 2026
HomeLatest Newsजयपुर नगर निगम चुनाव: 32 साल का सियासी सफर, 7 बोर्ड में...

जयपुर नगर निगम चुनाव: 32 साल का सियासी सफर, 7 बोर्ड में 6 बार भाजपा का दबदबा…इस बार 63.55% वोटिंग ने बढ़ाई हलचल

जयपुर नगर निगम चुनाव में इस बार 63.55% मतदान हुआ, जो पिछले निगम चुनाव के औसत 57.47% से करीब 6 प्रतिशत अधिक है। 1994 से अब तक जयपुर में 7 नगर निगम बोर्ड बने, जिनमें 6 बार भाजपा का दबदबा रहा। अब 150 वार्डों के एकीकृत बोर्ड में बहुमत का आंकड़ा 76 है। चुनाव परिणाम 14 सितंबर को आएंगे और इसके बाद निर्दलीय पार्षद मेयर चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

जयपुर। जयपुर की शहरी राजनीति पर नजर डालें तो 1994 से अब तक भाजपा का दबदबा साफ दिखाई देता है। 1994 से 2020 तक जयपुर में कुल 7 बोर्ड बने। इनमें 6 मौकों पर मेयर की कुर्सी भाजपा के पास रही, जबकि कांग्रेस को 2009 में सीधे मेयर चुनाव में जीत मिली थी। 2020 में जयपुर नगर निगम को ग्रेटर और हेरिटेज दो हिस्सों में बांटा गया था। जयपुर ग्रेटर में भाजपा ने बहुमत हासिल कर बोर्ड बनाया, जबकि हेरिटेज में कांग्रेस ने निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बोर्ड बनाया था। इस बार दोनों निगमों को फिर एकीकृत कर 150 वार्डों का चुनाव कराया गया है।

इस बार 63.55% मतदान, पिछली बार से 6% ज्यादा

जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के लिए हुए मतदान में 63.55 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। यह पिछले निगम चुनाव के संयुक्त औसत 57.47 प्रतिशत से करीब 6 प्रतिशत अधिक है। मतदान प्रतिशत में इस बढ़ोतरी ने राजनीतिक दलों की चिंता और उम्मीद दोनों बढ़ा दी हैं। हालांकि ज्यादा मतदान का सीधा फायदा किसी एक पार्टी को मिलता है, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

जयपुर के चुनावी इतिहास पर एक नजर

  • 1994: जयपुर में पहली बार नगर निगम चुनाव हुए। 51.20% मतदान हुआ और भाजपा ने 70 वार्डों में बहुमत हासिल किया। मोहनलाल गुप्ता मेयर बने।
  • 1999: मतदान बढ़कर 52.65% हुआ। भाजपा ने फिर बोर्ड बनाया और निर्मला वर्मा मेयर बनीं।
  • 2004: मतदान 11.35% घटकर 41.30% रह गया, लेकिन भाजपा ने 77 वार्डों में जीत के साथ बहुमत हासिल किया। अशोक परनामी मेयर बने।
  • 2009: पहली बार मेयर का सीधा चुनाव हुआ। मतदान 52.47% रहा और कांग्रेस की ज्योति खंडेलवाल मेयर चुनी गईं। भाजपा ने 47 पार्षद जीतकर निगम बोर्ड बनाया।
  • 2014: मतदान बढ़कर 60.34% पहुंचा। भाजपा ने 64 से ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज की और नाहटा मेयर बने।
  • 2020: नगर निगम को ग्रेटर और हेरिटेज में बांटा गया। ग्रेटर के 150 वार्डों में भाजपा ने 88 सीटें जीतकर बोर्ड बनाया। हेरिटेज के 100 वार्डों में कांग्रेस ने 47 सीटें जीतीं और निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाया।

मतदान बढ़ा तो किसे फायदा?

इस बार मतदान में करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी को राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। जयपुर के पारंपरिक चुनावी पैटर्न में भाजपा को शहरी इलाकों में मजबूत माना जाता रहा है। सांगानेर, विद्याधर नगर, झोटवाड़ा और मालवीय नगर जैसे क्षेत्र लंबे समय से भाजपा के मजबूत इलाकों में गिने जाते हैं। वहीं चारदीवारी के कई वार्डों में कांग्रेस की पकड़ मजबूत मानी जाती है। ऐसे में इस बार 150 वार्डों में दोनों दलों के बीच मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।

76 सीटें बहुमत के लिए जरूरी

एकीकृत जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड हैं। ऐसे में बोर्ड बनाने के लिए 76 पार्षदों का समर्थन जरूरी होगा। चुनाव परिणाम 14 सितंबर को सामने आएंगे। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि भाजपा या कांग्रेस में से कौन बहुमत के आंकड़े तक पहुंचता है।

निर्दलीय पार्षद बन सकते हैं किंगमेकर

अगर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही 76 के आंकड़े से दूर रहती हैं, तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। एक संभावित स्थिति में अगर निर्दलीय उम्मीदवार 15 से 20 वार्डों में मामूली अंतर से जीत हासिल करते हैं और दोनों प्रमुख दल 70 से कम सीटों पर रुक जाते हैं, तो मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसी स्थिति में मेयर पद के लिए होने वाले अप्रत्यक्ष चुनाव में दोनों प्रमुख दलों को निर्दलीयों का समर्थन जुटाना होगा।

कांग्रेस के लिए चारदीवारी और भाजपा के लिए आउटर इलाके अहम

राजनीतिक समीकरणों के मुताबिक कांग्रेस के लिए चारदीवारी के वार्ड महत्वपूर्ण रहेंगे, जबकि भाजपा को आउटर और पारंपरिक मजबूत इलाकों से बड़ी बढ़त की उम्मीद होगी। एक अनुमान के मुताबिक यदि कांग्रेस चारदीवारी में मजबूत प्रदर्शन करती है और आउटर इलाकों में भाजपा के बागी उम्मीदवार बड़ी संख्या में वोट काटते हैं, तो मुकाबला काफी नजदीकी हो सकता है। हालांकि ये सभी चुनावी समीकरण हैं और वास्तविक तस्वीर 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद ही साफ होगी।

22 शिकायतों ने भी बढ़ाई चुनावी हलचल

मतदान के दौरान कुल 22 शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। इनमें 18 जगह EVM खराब होने और 4 जगह फर्जी वोटिंग की शिकायतें शामिल हैं। वार्ड-110 के महाराजा स्कूल स्थित बूथ पर किशनपोल बाजार में पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल और कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मेठी के समर्थकों के बीच कहासुनी की भी जानकारी सामने आई। अब सभी की नजरें 14 सितंबर को आने वाले नतीजों पर हैं। परिणाम ही तय करेंगे कि जयपुर के एकीकृत नगर निगम की सत्ता किस पार्टी के हाथ में जाएगी और क्या 32 साल से चला आ रहा भाजपा का शहरी दबदबा एक बार फिर कायम रहेगा।

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Image