जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की गहमागहमी शांत होते ही अब पंचायतीराज संस्थाओं के आगामी आम चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सियासी पारा चढ़ने लगा है। चुनाव आयोग द्वारा आचार संहिता लागू किए जाने से ठीक पहले, राज्य सरकार अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने के लिए गांवों में विकास परियोजनाओं की झड़ी लगाने की तैयारी में जुट गई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और आयोजना विभाग की ओर से मिले कड़े निर्देशों के बाद ग्रामीण विकास विभाग एक्शन मोड में आ गया है। विभाग ने राज्य के सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) को पत्र भेजकर उन तमाम विकास कार्यों की लिस्ट तत्काल मांगी है, जिनका उद्घाटन या शिलान्यास किया जा सकता है।
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आचार संहिता से पहले सरकारी ‘विकास कार्ड’
सरकार की इस तेज रफ्तार कवायद को पंचायत चुनाव 2026 की घोषणा से ठीक पहले ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी उपलब्धियां गिनाने और सियासी पकड़ बनाने की ठोस योजना के तौर पर देखा जा रहा है।
जिला स्तर से रिपोर्ट आने के बाद जनप्रतिनिधियों के हाथों धड़ाधड़ उद्घाटन और शिलान्यास करवाए जाएंगे। हालांकि, चुनावी माहौल में किसी भी तरह के राजनीतिक विवाद से बचने के लिए प्रशासन ने फीता काटने को लेकर बेहद सख्त मापदंड भी तय किए हैं।
आरक्षण लॉटरी के बाद कभी भी लागू हो सकती है आचार संहिता
पंचायतीराज चुनावों के प्रशासनिक कार्यक्रम के अनुसार:
- 17 सितंबर 2026: जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य, प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों की सीटों के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली जाएगी।
- 18 सितंबर 2026: उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच पदों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी होगी।
आरक्षण लॉटरी फाइनल होते ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देगा। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिससे किसी भी नए काम की घोषणा या लोकार्पण पर रोक लग जाएगी। यही वजह है कि सरकार इस समय-सीमा के समाप्त होने से पहले ही स्वीकृत विकास कार्यों की लिस्ट भुनाना चाहती है।
किन कामों के कटेंगे फीते? तय की गईं 3 सख्त शर्तें
ग्रामीण विकास विभाग ने जिला परिषदों को साफ हिदायत दी है कि किसी भी गैर-नियमसंगत काम को सूची में न जोड़ा जाए:
- लोकार्पण के लिए शर्त: विकास कार्य का 100 प्रतिशत पूरा होना अनिवार्य है। साथ ही, कार्य पूरा होने की तारीख मौजूदा सरकार के कार्यकाल की ही होनी चाहिए।
- शिलान्यास के लिए शर्त: केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स को शामिल किया जाएगा, जिनका पहले कभी शिलान्यास न हुआ हो।
- कार्यादेश (Work Order) जरूरी: सिर्फ प्रशासनिक मंजूरी के आधार पर शिलान्यास नहीं होगा; सक्षम स्तर से वित्तीय मंजूरी के बाद कार्यादेश जारी होना अनिवार्य है।
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जिलों में युद्ध स्तर पर शुरू हुई छंटनी
आदेश मिलते ही जिला प्रशासनों ने अपने-अपने इलाकों में विकास प्रोजेक्ट्स की छंटनी शुरू कर दी है:
- सीकर जिला: प्रशासन ने 21 प्रमुख विकास प्रोजेक्ट्स छांटे हैं, जिनमें से 17 का केवल शिलान्यास होना है।
- उदयपुर जिला: गोगुंदा क्षेत्र में ‘अटल पथ’ का लोकार्पण प्रस्तावित है। इसके अलावा उदयपुर की 8 विधानसभाओं में ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के बाकी शिलान्यास निपटाए जाएंगे।
- बालोतरा जिला: जिला परिषद के नए भवनों और कई ग्रामीण सड़कों के लोकार्पण की तैयारी है।
ग्रामीण राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
गांवों में अचानक शुरू हुई इस प्रशासनिक हलचल से एक तरफ जहां लंबे समय से अटके पड़े विकास कार्यों को रफ्तार मिलने से ग्रामीण राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की सक्रियता भी चरम पर पहुंच गई है।
17 और 18 सितंबर की आरक्षण लॉटरी के बाद सीटों का समीकरण साफ होते ही प्रदेश के ग्रामीण इलाकों का सियासी माहौल पूरी तरह से चुनावी रंग में रंग जाएगा।



