जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित विश्व प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर अपनी ऐतिहासिक भव्यता के साथ-साथ एक अनूठी लोक आस्था के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। गणेश जन्मोत्सव (गणेश चतुर्थी) के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले ‘सिंजारा उत्सव’ पर यहाँ एक बेहद खास परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के चरणों में अर्पित की गई मेहंदी को यदि हाथों में लगाया जाए, तो विवाह में आ रही तमाम रुकावटें पल भर में दूर हो जाती हैं। इसी अटूट विश्वास के कारण हर साल यहाँ हजारों की तादाद में कुंवारे युवक-युवतियाँ और उनके परिजन ‘शीघ्र विवाह’ की मनोकामना लेकर पहुँचते हैं।
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‘सिंजारा’ के दिन मिलती है विशेष मेहंदी, रात से ही लगती हैं लंबी कतारें
गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले मनाए जाने वाले ‘सिंजारा पर्व’ के दिन मंदिर में भगवान गणेश को शुद्ध मेहंदी अर्पित की जाती है। इसके बाद यह मेहंदी प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटी जाती है। इस सिद्ध मेहंदी को पाने के लिए लोग एक रात पहले से ही मंदिर परिसर के बाहर लंबी-लंबी कतारों में लग जाते हैं।
पहले जहां सिर्फ जयपुर शहर के लोग ही इस परंपरा का हिस्सा बनते थे, वहीं अब सोशल मीडिया और डिजिटल दौर के कारण देश के कोने-कोने से लोग इस चमत्कारी मेहंदी के लिए जयपुर खिंचे चले आते हैं।
सवा किलो से बढ़कर 35 क्विंटल हुई मेहंदी, 200 साल पुरानी है परंपरा
1761 ईस्वी में जयपुर महाराजा सवाई माधव सिंह प्रथम के काल में सेठ जयराम पालीवाल द्वारा निर्मित इस ऐतिहासिक मंदिर में भगवान गणेश की दाईं ओर सूंड वाली दुर्लभ सिंदूरी प्रतिमा विराजमान है। मंदिर से जुड़े सेवादारों के अनुसार, गणेश जन्मोत्सव पर मेहंदी चढ़ाने की यह पावन परंपरा करीब दो शताब्दियों (200 साल) से निरंतर चली आ रही है।
शुरुआती दिनों में भगवान के चरणों में महज सवा किलो मेहंदी अर्पित की जाती थी, लेकिन भक्तों की बढ़ती अटूट आस्था को देखते हुए अब विश्व प्रसिद्ध पाली की सोजत मंडी से करीब 35 क्विंटल (3,500 किलोग्राम) मेहंदी मंगवाई जाती है।
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मनोकामना पूरी होने पर शादी का पहला कार्ड चढ़ाने आते हैं श्रद्धालु
श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि इस सिद्ध मेहंदी का स्पर्श हाथों में होते ही चट मंगनी और पट ब्याह के योग बनने लगते हैं। जिन युवक-युवतियों की शादी में अड़चनें आ रही होती हैं, वे यहाँ आकर मन्नत मांगते हैं। मनोकामना पूर्ण होने के बाद कई श्रद्धालु अगले साल भगवान गणेश के चरणों में अपनी शादी का पहला निमंत्रण पत्र (कुमकुम पत्रिका) अर्पित कर बप्पा का आभार जताने पहुँचते हैं।



