पुणे, महाराष्ट्र (प्रज्ञा पांडे)। पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाई. पाटिल का मंगलवार 4 जुलाई 2026 को कोल्हापुर में निधन हो गया। वे 90 साल के थे। परिवार ने बताया कि वे काफी समय से उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। डॉ. पाटिल का जन्म 22 अक्टूबर 1935 को हुआ था। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा काम किया। उन्होंने डी. वाई. पाटिल ग्रुप की शुरुआत की, जिसके तहत आज देशभर में 182 से ज्यादा कॉलेज और स्कूल, 7 डीम्ड यूनिवर्सिटी और कई अस्पताल चल रहे हैं। डॉ. डी. वाई. पाटिल को भारत में शिक्षा के विस्तार और खासतौर पर प्रोफेशनल शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में योगदान देने में लगाया। डॉ. पाटिल ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा नेटवर्क खड़ा किया, जिसके तहत मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कृषि और अन्य क्षेत्रों से जुड़े कई संस्थानों की स्थापना हुई। उनके प्रयासों से हजारों नहीं बल्कि लाखों छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसर मिले। उनकी सोच थी कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देश के युवाओं को आगे बढ़ने का सबसे मजबूत रास्ता दे सकती है। उनके नेतृत्व में स्थापित संस्थान आज भी उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र के अलावा डॉ. डी. वाई. पाटिल ने राजनीति और प्रशासन में भी अपनी पहचान बनाई। वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे और बाद में उन्हें बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। राज्यपाल के रूप में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय योगदान दिया। देश के प्रति उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1991 में पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया था।
डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन एक ऐसे दौर का अंत है, जिसमें उन्होंने शिक्षा को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का काम किया। उनके द्वारा स्थापित संस्थान आज भी छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। शिक्षा जगत में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों तक याद किया जाएगा।



