Rajasthan Water Crisis: गर्मी आई नहीं कि पानी की मुश्किल शुरू हो गई। कहीं पानी दो-दो दिन से नहीं आ रहा, अफसरों से शिकायत करो तो पाइप लाइन का लीकेज या फिर कोई अन्य बहाना बनाकर टाल रहे हैं। पत्रकार कॉलोनी ही नहीं सोढाला, सांगानेर में पानी की परेशानी जोरों पर है। हर साल यही हाल होता है-मार्च-अप्रैल में जल संकट की आहट और मई-जून में हालात और गंभीर। सवाल यह है कि आखिर हर बार चेतावनी के बावजूद ठोस तैयारी क्यों नहीं हो पाती? कुछ दिन पहले ही बिजली-पानी पर कहा गया था कि गर्मी में किसी भी हाल में न बिजली कटौती होगी न ही पानी की कोई दिक्कत आएगी। शहर की कई कॉलोनियों में पानी की सप्लाई या तो कम हो गई है या फिर अनियमित हो गई है। टैंकरों पर निर्भरता बढ़ रही है, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। जिन क्षेत्रों में पहले से ही पाइपलाइन कमजोर है, वहां हालात और बदतर हैं।
नई कॉलोनियों के बसने के साथ पानी की मांग तो बढ़ रही है, लेकिन आपूर्ति के स्थायी इंतजाम नहीं हो पा रहे। कई इलाकों में नलों से पानी की धार इतनी धीमी है कि टंकियां भरना मुश्किल हो रहा है। कुछ जगहों पर सप्लाई का समय घटा दिया गया है, तो कहीं एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। इससे आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ रही है। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है। सरकार हर बार पाइपलाइन सुधार, अतिरिक्त जल स्रोत और बेहतर वितरण व्यवस्था की बात करती है, लेकिन जमीन पर असर सीमित ही दिखता है। लीकेज की समस्या पुरानी है, पर उसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया। कई जगह अवैध कनेक्शन और अनियमित वितरण भी दबाव कम होने का कारण बनते हैं, लेकिन इन पर सख्त कार्रवाई नहीं होती। सबसे चिंता की बात यह है कि शहर की आबादी तेजी से बढ़ रही है, पर जल प्रबंधन उसी गति से मजबूत नहीं हो रहा। शहर के बाहरी इलाकों में कॉलोनियां तेजी से बसी हैं, लेकिन पानी की सप्लाई का ढांचा उसी अनुपात में विकसित नहीं हुआ। नई बस्तियां बस गईं, मगर पर्याप्त पाइपलाइन, रिजर्वायर और पंपिंग व्यवस्था नहीं बन सकी। इसके चलते मांग बढ़ी, लेकिन आपूर्ति सीमित ही रही। बाहरी क्षेत्रों में अभी भी कई जगहों पर सप्लाई बोरवेल पर आधारित है। गर्मियों में भूजल स्तर गिरने से बोरवेल की क्षमता कम हो जाती है, जिससे सप्लाई घट जाती है। यह स्थिति हर साल और गंभीर होती जा रही है। शहर के विस्तार के साथ जल प्रबंधन की समग्र योजना जरूरी थी, लेकिन अस्थायी उपायों से ही काम चलाया गया। वर्षा जल संचयन, जलाशयों का संरक्षण और वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
हर साल गर्मी शुरू होते ही जयपुर में जल संकट सामने आ जाता है। पत्रकार कॉलोनी, सोढ़ाला, सांगानेर जैसे बाहरी इलाकों में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है। बावजूद इसके हर साल वही समस्या, वही शिकायतें और वही अस्थायी समाधान-आखिर सरकारी अमला कर क्या रहा है? गर्मी से पहले जलापूर्ति की समीक्षा, पाइपलाइन दुरुस्ती और वैकल्पिक स्रोतों की तैयारी की जानी चाहिए, लेकिन यह सब कागजों तक सीमित रह जाता है। संकट सामने आने के बाद ही टैंकर भेजने, सप्लाई समय बदलने और अस्थायी बोरिंग करने जैसे उपाय शुरू होते हैं। इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता, केवल कुछ समय के लिए राहत मिलती है। यह भी सब जानते हैं कि गर्मी में पानी की खपत बढ़ती है, इसमें उसी समय के अनुरूप सप्लाई भी गलत है। कहीं-कहीं तो एक घंटा ही पानी आता है। उस पर बूस्टर के जरिए पानी की चोरी हो रही है सो अलग। अब कई बेचारे ठीक ढंग से पानी तक नहीं भर पाते। शिकायत करो तो फौरी चैकिंग के बाद सही करने का झूठा आश्वासन दे दिया जाता है। पानी को लेकर इस तरह की बदइंतजामी शर्मनाक है। सरकार को इसके लिए जिम्मेदार अफसरों को पाबंद करना चाहिए।



