Monday, May 25, 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर में बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाई, कहा- हाईकोर्ट ने जल्दबाजी में स्टे ऑर्डर हटा दिया था

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाते हुए प्रशासन को बड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि जस्थान हाई कोर्ट ने स्टे ऑर्डर हटाने में जल्दबाजी की, जिसके बाद कई निर्माण तोड़ दिए गए। जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने बची हुई संरचनाओं को गिराने पर तत्काल रोक लगा दी। मामला जयपुर की श्री राम कॉलोनी से जुड़ा है।

Supreme Court Bulldozer Action : जयपुर। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राजस्थान सरकार और प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी राहत दी है। अदालत ने साफ कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट ने पहले से लागू स्टे ऑर्डर हटाने में जल्दबाजी दिखाई, जिसके बाद प्रशासन ने कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई शुरू कर दी। जस्टिस दीपांकर दत्ता (Justice Dipankar Datta) और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा (Justice Satish Chandra Sharma) की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान माना कि प्रथम दृष्टया हाईकोर्ट का आदेश उचित नहीं लगता। कोर्ट ने संकेत दिया कि बिना पर्याप्त विचार के स्टे हटाने से प्रभावित लोगों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा। यह अहम सुनवाई श्री राम कॉलोनी विकास समिति की याचिका पर हुई, जिसमें बुलडोजर कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब किसी भी अन्य संरचना को नहीं तोड़ा जाएगा और प्रशासन को तत्काल प्रभाव से आगे की कार्रवाई रोकनी होगी। मामला जयपुर की श्री राम कॉलोनी से जुड़ा है, जहां कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा रहा था। याचिकाकर्ता समिति ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट द्वारा पहले दिया गया स्टे आदेश बाद में इम्पलीडमेंट आवेदन की सुनवाई के दौरान हटा दिया गया, जिसके बाद प्रशासन ने तेजी से बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि कई निर्माण पहले ही तोड़े जा चुके हैं और लगभग 10 ढांचे अभी भी गिराए जाने बाकी हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए बची हुई सभी संरचनाओं को गिराने पर रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

प्रथम दृष्टया अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हाईकोर्ट द्वारा स्टे हटाना उचित नहीं था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि हाईकोर्ट में लंबित विशेष अपील कानून के अनुसार तय की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके द्वारा लगाया गया रोक आदेश तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक हाईकोर्ट विशेष अपील पर फैसला नहीं कर देता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई पक्ष इस रोक आदेश को हटाने के लिए आवेदन देता है, तो हाईकोर्ट संबंधित पक्षों को सुनकर उस पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को निर्देश दिया कि आदेश की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाए ताकि आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित हो सके।

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Mukesh Kumar
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