जयपुर। हरियाली तीज के मौके पर वृंदावन में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। बांके बिहारी मंदिर में ठाकुरजी को विशेष रूप से हरे रंग के परिधान और आभूषणों से सजाया गया। मंदिर में मंगला दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों में ठाकुरजी के झूलन दर्शन को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।
1000 किलो के भव्य हिंडोले पर राधारानी संग विराजे ठाकुरजी
हरियाली तीज का सबसे बड़ा आकर्षण बांके बिहारी का भव्य हिंडोला रहा। मंदिर में ठाकुरजी को राधारानी के साथ सोने-चांदी से सुसज्जित हिंडोले पर विराजमान कराया गया। बताया गया कि इस हिंडोले का वजन करीब 1000 किलो है। हिंडोले के आसपास चार सखियों की प्रतिमाएं भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। मंदिर परिसर को फूलों और हरियाली से सजाया गया है।
8 लाख रुपये की पोशाक में नजर आए बांके बिहारी
हरियाली तीज के विशेष अवसर पर ठाकुरजी को आकर्षक हरे रंग की पोशाक पहनाई गई। जानकारी के मुताबिक इस विशेष पोशाक की कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है। हरे रंग के परिधान, विशेष आभूषण और भव्य श्रृंगार में बांके बिहारी की मनमोहक छवि देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
राधारानी संग झूला झूलते हैं ठाकुरजी
ब्रज की धार्मिक परंपरा में हरियाली तीज पर ठाकुरजी को झूला झुलाने का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर राधारानी और ठाकुरजी को एक साथ हिंडोले पर विराजमान कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज भगवान कृष्ण और राधारानी के प्रेम एवं मिलन से जुड़ा पर्व है। ब्रज में झूलन उत्सव इसी भावना के साथ बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
ठाकुरजी को लगाया गया घेवर और छप्पन भोग
हरियाली तीज के अवसर पर बांके बिहारी को विशेष भोग भी अर्पित किया गया। ठाकुरजी को घेवर और छप्पन भोग लगाया गया। मंदिर में भजन-कीर्तन और जयकारों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर भाव-विभोर दिखाई दिए।
झूलन दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़
बांके बिहारी के झूलन दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे। भक्तों में ठाकुरजी की एक झलक पाने के लिए खास उत्साह दिखाई दिया। मान्यता है कि हरियाली तीज पर हिंडोले में विराजमान ठाकुरजी के दर्शन करना शुभ माना जाता है और इससे परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
हिंडोले के पीछे है खास धार्मिक परंपरा
बांके बिहारी मंदिर में हिंडोला उत्सव से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में राधारानी और ठाकुरजी के विश्राम का भी वर्णन मिलता है। मान्यता के अनुसार जब राधारानी थक जाती हैं तो उन्हें विश्राम कराया जाता है और ठाकुरजी उनके श्रृंगार को संवारते हैं। इसी भाव के साथ ब्रज में हरियाली तीज का झूलन उत्सव श्रद्धा और प्रेम के साथ मनाया जाता है।



