पटना। बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हुई बदसलूकी के मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उनके आधिकारिक X अकाउंट से पीड़ित परिवार के साथ तस्वीर साझा की गई थी। तस्वीर में परिवार के सदस्यों के चेहरे स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। बताया गया कि पोस्ट करीब 15 मिनट बाद हटा दिया गया। इस मामले को लेकर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और राजद सांसद मीसा भारती ने सवाल उठाए हैं। दोनों ने नाबालिग पीड़िता की पहचान की गोपनीयता को लेकर कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात
पीड़ित परिवार ने 24 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। पीड़िता की मां ने बताया कि मुख्यमंत्री ने परिवार को सुरक्षा और न्याय का भरोसा दिया।परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि पुलिस की कार्रवाई से उन्हें राहत मिली है, लेकिन वे चाहते हैं कि मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटना किसी दूसरी लड़की के साथ न हो।
CM के सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक X हैंडल से मुलाकात के बाद एक पोस्ट किया गया। इसमें बताया गया कि उन्होंने जमुई की पीड़ित बच्ची और उसके परिवार से मुलाकात की तथा परिवार को जल्द न्याय का भरोसा दिया। पोस्ट में आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के जरिए जल्द सजा सुनिश्चित करने की बात भी कही गई थी। हालांकि, पोस्ट के साथ साझा की गई तस्वीर को लेकर विवाद शुरू हो गया। तस्वीर में परिवार के सदस्यों के चेहरे स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। इसके बाद पोस्ट को हटा दिया गया।
तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल
तस्वीर सामने आने के बाद तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नाबालिग पीड़िता से संबंधित तस्वीर सार्वजनिक किए जाने से उसकी पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ। तेजस्वी यादव ने POCSO कानून का हवाला देते हुए मामले में कार्रवाई और FIR की मांग की।
मीसा भारती ने भी मांगी कार्रवाई
राजद सांसद मीसा भारती ने भी मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने पुलिस से मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। मामले का मुख्य सवाल यह है कि क्या साझा की गई तस्वीर से नाबालिग पीड़िता की पहचान कानून के तहत संरक्षित गोपनीयता का उल्लंघन करती है। इसका कानूनी निर्धारण संबंधित जांच और सक्षम अधिकारियों/अदालत के स्तर पर होगा।
क्या है जमुई मामला?
जमुई में 10वीं कक्षा की एक छात्रा के साथ सड़क पर बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया था। रिपोर्टों के मुताबिक घटना 19 सितंबर की बताई गई है और वीडियो 21 सितंबर को वायरल हुआ। वीडियो में कुछ युवकों द्वारा छात्रा के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करते हुए दिखाई देने की बात सामने आई। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया।
6 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें तीन नाबालिग बताए गए हैं। मुख्य आरोपी के रूप में बताए जा रहे एक युवक के पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल होने की भी जानकारी सामने आई है और उसका इलाज पुलिस हिरासत में चल रहा है। पीड़िता को जल्द न्याय दिलाने के लिए प्रशासन ने महिला अधिकारियों को मामले की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। अधिकारियों के स्तर पर कानूनी प्रक्रिया और अदालत के साथ समन्वय के जरिए मामले को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
POCSO को लेकर क्यों है विवाद?
POCSO कानून के तहत यौन अपराधों से जुड़े मामलों में बच्चे की पहचान की सुरक्षा महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान सार्वजनिक न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। इसी वजह से मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाई गई तस्वीर को लेकर राजनीतिक और कानूनी सवाल उठे हैं। हालांकि, इस मामले में किसी कानूनी उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।



