जयपुर। राजस्थान की बेटी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। जयपुर के जमवारामगढ़ की आदिवासी युवा पर्वतारोही तुलसी मीणा ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो को फतह कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 19,341 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस शिखर पर पहुंचकर उन्होंने 31 अक्टूबर को भारतीय तिरंगा फहराया। खास बात यह रही कि इस अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान के जरिए तुलसी ने दुनिया को ‘सेव गर्ल चाइल्ड’ और महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दिया। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद तुलसी ने अपने सपने को पूरा किया। उनके अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स इकाई ने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत आर्थिक सहयोग दिया।
27 अक्टूबर को शुरू हुआ था पर्वतारोहण अभियान
तुलसी मीणा का पर्वतारोहण अभियान 27 अक्टूबर को तंजानिया के मोशी शहर से शुरू हुआ था। 360 Explorer की ओर से आयोजित इस अभियान में उन्हें अलग-अलग जलवायु और कठिन पर्वतीय परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान में गिरावट, कम ऑक्सीजन, तेज ठंड और शारीरिक थकान जैसी चुनौतियां सामने आईं। इन सभी मुश्किलों का सामना करते हुए तुलसी 31 अक्टूबर को माउंट किलिमंजारो के शिखर पर पहुंचीं और वहां भारतीय तिरंगा फहराया।
‘सेव गर्ल चाइल्ड’ का दिया संदेश
तुलसी मीणा की यह उपलब्धि सिर्फ पर्वतारोहण तक सीमित नहीं है। उन्होंने माउंट किलिमंजारो की चोटी पर पहुंचकर ‘सेव गर्ल चाइल्ड’ का संदेश दिया। उनकी इस पहल का उद्देश्य बेटियों को आगे बढ़ने, अपने सपने पूरे करने और हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित करना है। तुलसी की सफलता यह संदेश देती है कि आर्थिक परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मजबूत इच्छाशक्ति और सही सहयोग से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
आर्थिक चुनौतियों को पीछे छोड़ हासिल की सफलता
जमवारामगढ़ की रहने वाली तुलसी मीणा के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में शामिल होना आसान नहीं था। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति उनके सपनों की राह में बड़ी चुनौती बन रही थी। ऐसे समय में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड ने सीएसआर के तहत सहयोग दिया। इस मदद से तुलसी को अंतरराष्ट्रीय अभियान में शामिल होने का अवसर मिला और उन्होंने अपनी मेहनत, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचकर इतिहास रच दिया। तुलसी ने इस उपलब्धि का श्रेय एचसीएल के सहयोग को देते हुए कहा कि कंपनी के समर्थन के बिना उनके लिए यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं होता।
360 Explorer के संस्थापक ने की तुलसी की तारीफ
360 Explorer के संस्थापक और एवरेस्ट विजेता आनंद बनसोडे ने तुलसी मीणा की उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि तुलसी जैसे युवा पर्वतारोहियों को माउंट किलिमंजारो जैसे चुनौतीपूर्ण शिखर तक पहुंचने में मार्गदर्शन देना गर्व की बात है। तुलसी ने अपने साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से इस अभियान को सफल बनाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि तुलसी की उपलब्धि अन्य युवाओं, खासकर बेटियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।
माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई क्यों है चुनौतीपूर्ण?
तंजानिया में स्थित माउंट किलिमंजारो दुनिया के प्रसिद्ध पर्वतारोहण स्थलों में शामिल है। इसकी चढ़ाई के दौरान पर्वतारोहियों को अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों से गुजरना पड़ता है। शुरुआत में घने जंगल, इसके बाद ऊंचाई वाले शुष्क क्षेत्र और अंत में बर्फ तथा हिमनदों से प्रभावित शिखर क्षेत्र आता है। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की उपलब्धता कम हो जाती है। ऐसे में पर्वतारोहियों को अत्यधिक ठंड, निर्जलीकरण, थकान और एक्यूट माउंटेन सिकनेस जैसी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस अभियान में उचित प्रशिक्षण, शरीर को ऊंचाई के अनुकूल ढालना और अनुभवी गाइड का मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण होता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया राजस्थान का मान
जयपुर के जमवारामगढ़ से निकलकर अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचने वाली तुलसी मीणा की कहानी आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। भारतीय तिरंगा फहराने के साथ बेटियों के सशक्तिकरण का संदेश देना उनकी इस उपलब्धि को और खास बनाता है। तुलसी ने साबित कर दिया कि सपने देखने के साथ उन्हें पूरा करने का साहस भी जरूरी है। उनकी सफलता से राजस्थान का गौरव अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ा है।



