मुंबई। धनतेरस से पहले भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। गुरुवार 5 नवंबर को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार खरीदारी हुई। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1600 अंक से ज्यादा उछलकर 78,900 के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 24,400 के पार निकल गया। इस तेजी से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। लगातार छह कारोबारी सत्रों से जारी तेजी ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स करीब 1.9 प्रतिशत और निफ्टी करीब 1.8 प्रतिशत तक चढ़ा। बाजार में तेजी के पीछे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
6 दिन में सेंसेक्स करीब 5500 अंक चढ़ा
भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला पिछले छह कारोबारी सत्रों से जारी है। 28 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच सेंसेक्स में करीब 5500 अंकों की बढ़त दर्ज की गई है। इस तेजी के साथ बाजार ने एक बार फिर मजबूत वापसी की है। निफ्टी भी करीब तीन महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। बाजार में बैंकिंग, ऑटो, फाइनेंशियल और अन्य प्रमुख सेक्टर के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
शेयर बाजार में तेजी की 4 बड़ी वजह
1. अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की पार्टी को झटका
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनावी नतीजे का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका की नीतियों में बदलाव से व्यापारिक तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध की स्थिति में नरमी आ सकती है। इससे वैश्विक कारोबार और निवेश का माहौल बेहतर होने की उम्मीद बढ़ी है। अमेरिकी शेयर बाजार में भी चुनावी नतीजों के बाद जोरदार तेजी दर्ज की गई। इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
2. कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। ब्रेंट क्रूड करीब 93.50 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने से देश का आयात बिल घट सकता है। इससे महंगाई और आर्थिक दबाव कम होने की उम्मीद रहती है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से पेंट, एविएशन और अन्य तेल आधारित कंपनियों के शेयरों को भी फायदा मिल सकता है।
3. कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से बढ़ा भरोसा
सितंबर तिमाही के कंपनियों के नतीजों ने भी बाजार का सेंटिमेंट मजबूत किया है। बड़ी कंपनियों के कारोबार और मुनाफे से जुड़े सकारात्मक संकेतों के कारण निवेशकों की खरीदारी बढ़ी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और टीसीएस जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। इसके अलावा बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी।
4. विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को सपोर्ट
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की खरीदारी भी तेजी की अहम वजह बनी है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयरों में करीब 7,284 करोड़ रुपये की खरीदारी की। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी से बाजार में लिक्विडिटी और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। अमेरिकी बाजार में तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद से भारतीय बाजार में विदेशी निवेश का रुझान मजबूत हुआ है।
निवेशकों की दौलत में करीब ₹8 लाख करोड़ का इजाफा
शेयर बाजार में आई तेजी का सीधा फायदा निवेशकों को मिला है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 501 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया। सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में खरीदारी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। इससे बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी का माहौल बना।



