भारतीय पहलवान मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती में इतिहास रच दिया है। उन्होंने विमेंस वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के 59 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। शुक्रवार को कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में खेले गए फाइनल मुकाबले में मनीषा ने अमेरिका की एबिगेल नेट को 8-6 से शिकस्त दी। खास बात यह रही कि मुकाबले के दौरान एक समय मनीषा 1-5 से पिछड़ रही थीं, लेकिन आखिरी तीन मिनट में शानदार वापसी करते हुए सात अंक जुटाए और जीत अपने नाम कर ली।
इस ऐतिहासिक जीत के साथ मनीषा विमेंस वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उनकी इस कामयाबी के पीछे वर्षों की मेहनत और पिता का सपना भी जुड़ा है। मनीषा के पिता सुरेश चाहते थे कि उनकी बेटी एक दिन विश्व चैंपियन बने। हालांकि, 17 अप्रैल 2022 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। आज बेटी की इस उपलब्धि को उनके पिता के सपने के पूरा होने के रूप में देखा जा रहा है।
पिता ने फिटनेस के लिए कुश्ती कैंप भेजा, फिर बना करियर
मनीषा भानवाला के कुश्ती सफर की शुरुआत साल 2013 में हुई थी। उनके पिता सुरेश ने फिटनेस बेहतर करने के उद्देश्य से उन्हें कुश्ती ट्रेनिंग कैंप भेजा था। शुरुआत में शौक के तौर पर शुरू हुई कुश्ती धीरे-धीरे उनका जुनून और करियर बन गई। रोहतक के छोटूराम अखाड़े में उन्होंने अपनी प्रतिभा को निखारा। इस दौरान कोच मंदीप सिंह और जापानी कोच कोसेई अकाइशी का मार्गदर्शन भी उनके लिए अहम रहा।
एशियन गेम्स की हार के बाद बदला वजन वर्ग
मनीषा के लिए साल 2026 चुनौतियों से भरा रहा। एशियन गेम्स में उन्होंने 57 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लिया था, जहां क्वार्टर फाइनल में जापान की अकारी फुजिनामी के खिलाफ उन्हें 0-3 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने 59 किलोग्राम वर्ग में उतरने का फैसला किया। इससे पहले वह 62 किलोग्राम वर्ग में भी अपनी चुनौती पेश कर चुकी हैं।
लगातार तीन जीत के साथ फाइनल में बनाई जगह
गोल्ड मेडल तक पहुंचने का मनीषा का सफर भी शानदार रहा। उन्होंने कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को पिनफॉल के जरिए हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखू को 6-0 से मात दी। सेमीफाइनल में मेजबान कजाकिस्तान की अल्टिन शागायेवा को 10-0 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। फाइनल में पिछड़ने के बावजूद मनीषा ने जिस जज्बे और आत्मविश्वास के साथ वापसी की, उसने उन्हें विश्व चैंपियन बना दिया। उनकी यह जीत भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में एक यादगार उपलब्धि बन गई है।



