बेंगलुरु। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने देश में ‘अघोषित आपातकाल’ जैसे हालात होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात करेंगे। यह बैठक सोमवार, 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच तय होने की जानकारी दी गई है। बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान खरगे ने बताया कि उन्होंने और राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। उनका कहना है कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल न्यायपालिका के सामने देश के मौजूदा हालात और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़ी अपनी चिंताओं को रखेगा।
CJI से कोई मांग नहीं, अपनी बात रखेगा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल
खरगे ने साफ किया कि मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के दौरान कांग्रेस कोई विशेष मांग रखने नहीं जा रही है। उनके मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल विनम्रता से अपनी चिंताएं रखेगा और न्यायपालिका को मौजूदा परिस्थितियों से अवगत कराएगा। यह मुलाकात ऐसे समय प्रस्तावित है, जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि इन मुद्दों पर उसकी चिंताओं का उचित समाधान नहीं हो रहा है।
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प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर भी साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर देश में भय और अव्यवस्था का माहौल बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को ‘अघोषित आपातकाल’ करार देते हुए कहा कि कांग्रेस इन्हीं मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही है।
खरगे के बयान राजनीतिक आरोप हैं। केंद्र सरकार का पक्ष और इन आरोपों पर उसकी प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। फिलहाल, कांग्रेस अपने विरोध को लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े सवालों के तौर पर पेश कर रही है।
32 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती पर खरगे ने उठाए सवाल
खरगे ने हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान करीब 32 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को क्यों तैनात करना पड़ा। उन्होंने इसे सरकार की आशंका और विरोध से जुड़े डर से जोड़कर देखा।
हाल के दिनों में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और कई जगह प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। खरगे का कहना है कि विरोध की आवाज को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और ‘वोट चोरी’ का मुद्दा भी उठाया
खरगे ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले पा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने आयोग के कामकाज से जुड़ी कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने 2023 के चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से जुड़े कानून पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयुक्तों को दिए गए कानूनी संरक्षण से जवाबदेही प्रभावित हो सकती है। खरगे ने EVM और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर भी सरकार तथा चुनाव आयोग को घेरा। ये कांग्रेस के आरोप हैं; इनका उल्लेख पार्टी के रुख के रूप में किया जा रहा है, न कि किसी सिद्ध निष्कर्ष के तौर पर।
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सोमवार की मुलाकात पर रहेगी नजर
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की CJI से प्रस्तावित मुलाकात को कांग्रेस की ओर से संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि प्रतिनिधिमंडल मुख्य न्यायाधीश के सामने किन मुद्दों को विस्तार से रखता है और मुलाकात के बाद कांग्रेस की ओर से क्या जानकारी साझा की जाती है।



