नई दिल्ली। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने गुरुग्राम में अपने घर से हिरासत में लिए जाने के मामले पर वीडियो जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें न तो औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया और न ही हिरासत की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी दी गई, बल्कि उनके शब्दों में उन्हें ‘किडनैप’ किया गया। रिहाई के बाद जारी वीडियो में उन्होंने अपनी नागरिकता को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सफाई दी और भारतीय पासपोर्ट दिखाया।
ध्रुव राठी को 10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया था। रविवार, 11 अक्टूबर को सामने आए उनके वीडियो के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
ध्रुव राठी ने बताया, सुबह घर से ले गई पुलिस
ध्रुव राठी के मुताबिक, 10 अक्टूबर की सुबह वह अपने घर में सो रहे थे, तभी कई लोग वहां पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि उनकी मां ने दरवाजा खोला और इसके बाद करीब 20 लोग घर के अंदर आ गए। राठी का कहना है कि वे सीधे उनके बेडरूम तक पहुंचे और उन्हें संभलने का मौका दिए बिना अपने साथ ले गए।
अपने वीडियो में राठी ने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें चप्पल पहनने तक का समय नहीं दिया गया और उन्हें चोटें भी आईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें अलग-अलग पुलिस कार्यालयों में ले जाया गया और उनका तथा उनके माता-पिता का फोन ले लिया गया।
राठी के अनुसार, उन्होंने वकील से बात करने और फोन इस्तेमाल करने की मांग की, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली। उन्होंने बताया कि करीब 22 से 23 घंटे तक उन्हें इस स्थिति का सामना करना पड़ा। ये सभी बातें ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में आरोप के तौर पर कही हैं।
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भारतीय पासपोर्ट दिखाकर नागरिकता पर दी सफाई
वीडियो में ध्रुव राठी ने अपना भारतीय पासपोर्ट दिखाया और कहा कि वह भारतीय नागरिक हैं। उन्होंने विदेशी पासपोर्ट धारक होने से जुड़ी चर्चाओं को गलत बताया। उनका आरोप है कि उनकी नागरिकता को लेकर गलत जानकारी फैलाकर पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है।
ध्रुव राठी ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए केंद्र सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना भी की। वीडियो के अंत में उन्होंने ‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम’ कहा।
पुलिस ने क्यों लिया था ध्रुव राठी को हिरासत में?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पहुंचने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने और प्रतिबंधात्मक आदेश लागू रहने का हवाला देते हुए कार्रवाई की थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ध्रुव राठी को गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित केंद्रीय विहार इलाके से हिरासत में लिया गया और बाद में क्राइम ब्रांच कार्यालय ले जाकर पूछताछ की गई। उन्हें शनिवार देर रात रिहा कर दिया गया। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन में शामिल न होने की चेतावनी दी थी।
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रिहाई के बाद भी जारी है विवाद
ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में हिरासत के तरीके पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस से जुड़ी रिपोर्टों में कार्रवाई को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले की गई एहतियाती कार्रवाई बताया गया है। दोनों पक्षों के बयानों के बीच हिरासत की प्रक्रिया, कानूनी आधार और वकील से संपर्क की अनुमति जैसे सवाल अहम बने हुए हैं।
फिलहाल ध्रुव राठी रिहा हो चुके हैं। उनके आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी परिस्थितियों पर आगे कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है तो मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।



