US Supreme Court Tariff Ruling : नई दिल्ली। अमेरिका में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद हजारों कंपनियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। दरअसल, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर आए इस निर्णय के बाद अब कंपनियों को उनके चुकाए गए पैसे वापस मिलेंगे। सोमवार से इन कारोबारियों के लिए रिफंड प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिससे लंबे समय से राहत की उम्मीद लगाए बैठे आयातकों को बड़ा फायदा मिल सकता है। यह फैसला न सिर्फ कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका असर आगे चलकर बाजार और उपभोक्ताओं पर भी देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में साफ कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ संवैधानिक दायरे से बाहर थे। कोर्ट के 6-3 के निर्णय के अनुसार, ऐसे आर्थिक फैसले लेने का अधिकार कांग्रेस के पास होता है, न कि राष्ट्रपति के पास। इस फैसले के बाद अमेरिकी सरकार ने प्रभावित कंपनियों को राहत देने के लिए टैरिफ राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) को सौंपी गई है, जो रिफंड से जुड़ी सभी औपचारिकताओं को पूरा करेगी।

सोमवार सुबह से शुरू होगा ऑनलाइन पोर्टल
सीबीपी के मुताबिक, सोमवार सुबह 8 बजे से एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां आयात करने वाली कंपनियां और उनके एजेंट रिफंड के लिए आवेदन कर सकेंगे। कंपनियों को उन सभी सामानों का विवरण देना होगा, जिन पर उन्होंने टैरिफ चुकाया था। यदि आवेदन सही पाया गया, तो 60 से 90 दिनों के अंदर पैसा वापस मिल सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया काफी जटिल है और एक साथ सभी को पैसे नहीं मिलेंगे। सरकार इसे चरणों (फेज) में लागू करेगी, जिसमें पहले हाल के भुगतानों को प्राथमिकता दी जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 3.3 लाख आयातकों ने 5.3 करोड़ से ज्यादा शिपमेंट पर कुल लगभग 166 अरब डॉलर (करीब लाखों करोड़ रुपये) का टैरिफ भरा था। फिलहाल पहले चरण में उन्हीं मामलों को शामिल किया गया है, जहां टैरिफ का अंतिम हिसाब नहीं हुआ था या हाल ही में भुगतान किया गया था।
रजिस्ट्रेशन है अनिवार्य
बता दें कि, रिफंड पाने के लिए कंपनियों को सीबीपी के इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम में रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है। 14 अप्रैल तक करीब 56,497 कंपनियां रजिस्टर कर चुकी थीं और उन्हें कुल 127 अरब डॉलर (ब्याज सहित) तक की वापसी मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका फायदा आगे चलकर आम ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है, क्योंकि कई कंपनियां ये पैसा वापस मिलने पर ग्राहकों को भी राहत दे सकती हैं। हालांकि, यह प्रक्रिया धीरे-धीरे ही पूरी होगी।



