खुलने लगी हैं। बाजारों में रौनक बढ़ रही है, लेकिन इस रौनक के बीच दुकानों पर सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं? इसको लेकर सब बेखबर हैं। क्या सभी दुकानदारों के पास जरूरी लाइसेंस हैं? क्या आग बुझाने के उपकरण उपलब्ध हैं? क्या दुकानें निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर लगाई गई हैं? इनके बिना पटाखों की बिक्री की व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित कैसे माना जा सकता है? पटाखों का कारोबार सामान्य व्यापार जैसा नहीं है। इसमें जरा-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। पटाखों में आग लगने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद हर साल दीपावली के आसपास सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े होते हैं। दुकानें खुल जाती हैं, बाजारों में भीड़ बढ़ने लगती है और प्रशासन की निगरानी पर निर्भरता बनी रहती है। आखिर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पहले से सुनिश्चित क्यों नहीं किए जाते?
जयपुर जैसे बड़े शहर में यह चिंता और बढ़ जाती है। भीड़भाड़ वाले बाजारों, संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पटाखों की दुकानें होने पर खतरा अधिक गंभीर हो सकता है। ऐसे में दुकानों के लिए स्थान तय करने से लेकर लाइसेंस जारी करने और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तक हर स्तर पर सतर्कता जरूरी है। केवल लाइसेंस जारी कर देना ही पर्याप्त नहीं है, यह देखना भी जरूरी है कि दुकानदार निर्धारित शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं। लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया समय पर पूरी क्यों नहीं होती? यदि दीपावली पर पटाखों की बिक्री पहले से तय है, तो आवेदन, जांच और अनुमति की प्रक्रिया भी पर्याप्त समय रहते पूरी की जानी चाहिए। अंतिम दिनों में लाइसेंस जारी करने की जल्दबाजी और दुकानों के निरीक्षण में ढिलाई से बचना जरूरी है। प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी दुकानों को अनुमति दी गई है, कितनी दुकानों की जांच हो चुकी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
पटाखों की बिक्री के दौरान पुलिस, स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय और अग्निशमन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इन विभागों के बीच समन्वय के बिना सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकती। दुकानों पर आग बुझाने के साधन, सुरक्षित बिजली व्यवस्था, पर्याप्त दूरी और आपात स्थिति में बचाव के उपाय सुनिश्चित होने चाहिए। किसी दुकान में कमी मिलने पर उसे दूर कराने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए और गंभीर उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। प्रदूषण को लेकर भी हर साल चिंता जताई जाती है। ग्रीन पटाखों और निर्धारित मानकों की चर्चा होती है, लेकिन इन नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। लोगों को जागरूक करने के साथ यह देखना जरूरी है कि बिक्री और इस्तेमाल से संबंधित लागू नियमों का उल्लंघन न हो। केवल चेतावनी जारी करने या त्योहार के समय अभियान चलाने से काम नहीं चलेगा, नियमित निगरानी भी करनी होगी।
त्योहार पर कारोबार होना चाहिए, लेकिन लोगों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं। दुकानदारों को नियमों के मुताबिक कारोबार करने का अवसर मिले और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी पूरी गंभीरता से निभाए। यदि लाइसेंस के बिना या सुरक्षा मानकों की अनदेखी करके दुकानें चल रही हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। वहीं, नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों को अनावश्यक परेशानी से बचाना भी जरूरी है। दुकानों की संख्या गिनने के बजाय सुरक्षा इंतजामों की वास्तविक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। लाइसेंस की जांच हो, अग्निशमन व्यवस्था परखी जाए और बाजारों में नियमित निरीक्षण किया जाए। हादसा होने के बाद जांच और मुआवजे की घोषणा करने से बेहतर है कि पहले ही जरूरी कदम उठा लिए जाएं। दीपावली खुशियों का त्योहार है और इन खुशियों को सुरक्षित बनाए रखना प्रशासन, कारोबारियों और आम लोगों की साझा जिम्मेदारी है।



