US Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौरे की बातचीत से पहले तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. इस बीच ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा है कि दुनिया भर में ईंधन की कीमतें तभी स्थिर हो सकती हैं जब ईरानी के तेल निर्यात पर आर्थिक और सैन्य दबाव समाप्त किए जाएं. उपराष्ट्रपति ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कहा, ‘ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगाकर दूसरों के लिए फ्री सिक्योरिटी की उम्मीद नहीं की जा सकती. ऑप्शन साफ है, या तो सभी के लिए एक फ्री ऑयल मार्केट या सभी के लिए भारी लागत का जोखिम.’
तेल की कीमतों में उछाल
ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध के कारण टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने से रोके जाने की वजह से रविवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई. ‘शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज’ में कारोबार फिर से शुरू होने के बाद अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 6.4 प्रतिशत बढ़कर 87.88 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई. अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.5 प्रतिशत बढ़कर 96.25 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई.
ट्रंप के ऐलान के बाद ईरान ने पलटा फैसला
ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण है और उसने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वह अपने तट से सटे इस मार्ग को वाणिज्यिक यातायात के लिए पूरी तरह से खोल देगा. इस खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा कर दी कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी, जिसके बाद तेहरान ने शनिवार को अपना फैसला पलट दिया.
युद्ध के कारण खड़ा हुआ भीषण ऊर्जा संकट
अमेरिका-इजराइल का ईरान के खिलाफ युद्ध अब 8वें सप्ताह में है. इस युद्ध ने दशकों में सबसे भीषण वैश्विक ऊर्जा संकटों में से एक को जन्म दिया है. एशिया और यूरोप के वे देश जो पश्चिम एशिया से अपने तेल का एक बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करते हैं, सप्लाई रुकने और उत्पादन में कटौती से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. वहीं पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन की तेजी से बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर के व्यवसायों और उपभोक्ताओं को प्रभावित किया है.



