Thursday, July 2, 2026
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यूरोप के घरों का डिजाइन बना मुसीबत, हीटवेव में लोग झेल रहे ‘ओवन’ जैसी गर्मी

यूरोप में रिकॉर्डतोड़ हीटवेव के दौरान घर 'ओवन' जैसे क्यों हो जाते हैं? जानिए इसकी वजह, पारंपरिक हाउसिंग डिजाइन, एसी की कमी और विशेषज्ञों के समाधान।

यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है। भीषण गर्मी ने न केवल लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है, बल्कि दशकों पुरानी हाउसिंग डिजाइन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस से लेकर ब्रिटेन के लंदन तक बड़ी संख्या में लोग ऐसे घरों में रह रहे हैं, जिन्हें कभी कड़ाके की सर्दी से बचाने के लिए बनाया गया था। अब यही घर गर्मियों में ‘हीट ट्रैप’ बनकर अंदर की गर्मी को कैद कर रहे हैं, जिससे कई मकान ‘ओवन’ जैसे महसूस होने लगे हैं।

सर्दी के लिए बने घर, अब गर्मी में बन रहे परेशानी की वजह

यूरोप के अधिकांश पुराने घरों का निर्माण बेहद ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर किया गया था। इनमें मोटी दीवारें, मजबूत इंसुलेशन, डबल या ट्रिपल ग्लेज़्ड खिड़कियां और ऐसी छतें बनाई गईं, जो अंदर की गर्मी को लंबे समय तक बनाए रखें। इससे सर्दियों में ऊर्जा की बचत होती थी और घर गर्म रहते थे। लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में गर्मियां पहले से अधिक लंबी और तीव्र हो गई हैं। ऐसे में यही इंसुलेशन बाहरी गर्मी को भी अंदर फंसा देता है, जिससे घरों का तापमान लगातार बढ़ता रहता है।

पेरिस में अटारी का कमरा बना ‘ओवन’

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पेरिस में रहने वाले 21 वर्षीय यूलिस ज़ाकरी का केवल 9 वर्गमीटर का अटारी वाला कमरा कुछ घंटों की धूप के बाद बेहद गर्म हो जाता है। उन्होंने बताया कि कमरे में इतनी गर्मी हो जाती है कि साबुन तक पिघल जाते हैं और शराब की बोतलों के कॉर्क दबाव के कारण बाहर निकल आते हैं। रात में उन्हें गीले तौलिये के सहारे सोना पड़ता है।

यूरोप में हर घर में एसी क्यों नहीं?

यूरोप के केवल लगभग 25 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनिंग की सुविधा है, जबकि अमेरिका और जापान में यह आंकड़ा करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोप में लंबे समय तक एसी की जरूरत महसूस नहीं हुई क्योंकि वहां गर्मियां अपेक्षाकृत हल्की रहती थीं। इसके अलावा ऊर्जा बचाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की नीतियों के कारण भी एयर कंडीशनर का उपयोग सीमित रहा।

एसी बढ़ाएगा ‘अर्बन हीट आइलैंड’ का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर एयर कंडीशनर चलने से घरों की गर्म हवा बाहर निकलती है, जिससे शहरों का तापमान और बढ़ सकता है। इस स्थिति को ‘अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव’ कहा जाता है, जिसमें शहर आसपास के क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म महसूस होते हैं।

स्पेन के घरों से मिल सकता है समाधान

यूरोप के सभी देशों की स्थिति समान नहीं है। स्पेन जैसे गर्म देशों में पारंपरिक रूप से हल्के रंग की बाहरी दीवारें, मोटी दीवारें, छोटी खिड़कियां, बाहरी शटर और प्राकृतिक वेंटिलेशन वाले घर बनाए जाते हैं। ये डिजाइन सूरज की गर्मी को अंदर आने से रोकते हैं और घरों को अपेक्षाकृत ठंडा बनाए रखते हैं।

सिर्फ एसी नहीं, बदलनी होगी इमारतों की डिजाइन

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की इमारतों में केवल एयर कंडीशनर पर निर्भर रहने के बजाय बाहरी शटर, छज्जे, बेहतर वेंटिलेशन, रिफ्लेक्टिव छतें, हरित क्षेत्र और पेड़-पौधों जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देनी होगी। इससे घरों के अंदर तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।

जलवायु परिवर्तन ने बदल दी चुनौती

वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में अत्यधिक गर्मी की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्र हो रही हैं। ऐसे में केवल लोगों की जीवनशैली बदलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आने वाले समय में घरों और शहरों की डिजाइन भी बदलनी पड़ेगी।

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