वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। ट्रंप ने स्वीकार किया है कि तुर्किये से यात्रा के दौरान संभावित ईरानी खतरे को देखते हुए उनका विमान बदला गया था। सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर ट्रंप को एक विमान से निकालकर अमेरिकी वायुसेना के दूसरे विमान में गुप्त रूप से पहुंचाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को एयरपोर्ट पर सामान और भोजन पहुंचाने वाले एक केटरिंग ट्रक के जरिए दूसरे विमान तक ले जाया गया। इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी बेहद सीमित अधिकारियों और सुरक्षा टीम के पास थी।
हमले का खतरा था, इसलिए बदला विमान
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर हमला होता तो जिस विमान में वह मौजूद होते, वही संभावित निशाना बनता। उन्होंने कहा कि वह सुरक्षा एजेंसियों की सलाह के मुताबिक कदम उठाते हैं और उन्हें लगातार खतरे की जानकारी मिलती रहती है। ट्रंप के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को उनके खिलाफ खतरे का इनपुट मिला था। इसी वजह से यात्रा के दौरान उनकी वास्तविक लोकेशन और विमान की जानकारी को गोपनीय रखने का फैसला किया गया।
यह खबर भी पढ़ें:-अमेरिकी चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा हमला, डेमोक्रेट उम्मीदवारों को बताया ‘जिहादी’ और ‘साम्यवादी’
कतर के विमान से तुर्किये पहुंचे थे ट्रंप
ट्रंप तुर्किये की यात्रा के लिए बोइंग 747-8 विमान से पहुंचे थे। यह विमान कतर की ओर से अमेरिका को दिया गया था और बाद में राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया। तुर्किये से वापसी के दौरान शुरुआत में ऐसा दिखाई दिया कि ट्रंप उसी विमान से रवाना होंगे। हालांकि, सुरक्षा योजना के तहत उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के VIP सैन्य विमान C-32A में स्थानांतरित कर दिया गया।
केटरिंग ट्रक के जरिए बदली गई लोकेशन
सुरक्षा व्यवस्था के तहत ट्रंप को एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाले केटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक पहुंचाया गया। इस दौरान राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को छिपाकर रखा गया, ताकि संभावित खतरे के बीच उनकी लोकेशन सार्वजनिक न हो। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को लेकर C-32A विमान पहले ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ समय बाद वह विमान भी वहां पहुंचा, जिसमें पत्रकार यात्रा कर रहे थे।
पत्रकारों को भी नहीं थी पूरी जानकारी
राष्ट्रपति की यात्रा को कवर करने वाले पत्रकारों को शुरुआत में यही जानकारी थी कि ट्रंप उसी विमान में यात्रा कर रहे हैं, जिसमें वे खुद मौजूद थे। हालांकि, उड़ान के दौरान पत्रकारों को विमान की खिड़कियों के शेड नीचे रखने के लिए कहा गया। बाद में ट्रंप से इस सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा गया। उन्होंने संकेत दिया कि यात्रा के दौरान खतरे की आशंका थी और सुरक्षा कारणों से इस तरह की सावधानी बरती गई।
यह खबर भी पढ़ें:-FCRA Bill 2026 पर घमासान के बीच विनय मोहन क्वात्रा की सफाई, बोले- विदेशी चंदे पर रोक नहीं
कुछ ही घंटों में तैयार हुआ सुरक्षा ऑपरेशन
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले कथित विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह सुरक्षा योजना तेजी से तैयार की गई थी। इसमें अमेरिकी सैन्य और सुरक्षा तंत्र के चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को गोपनीय रखना और संभावित हमले की स्थिति में जोखिम को कम करना था।
कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर उठे सवाल
ट्रंप जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार की ओर से अमेरिका को दिया गया था। अमेरिकी रक्षा कंपनी L3Harris Technologies ने इस विमान को राष्ट्रपति के इस्तेमाल के अनुरूप तैयार किया है। हालांकि, इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से चर्चा होती रही है। पुराने एयर फोर्स वन में राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा प्रणालियां मौजूद हैं। नए विमान में इन प्रणालियों की क्षमता और स्वरूप को लेकर अमेरिकी मीडिया में सवाल उठाए गए हैं।
व्हाइट हाउस ने सुरक्षा में कमी से किया इनकार
नए विमान की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों पर व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति और उनके साथ मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए विमान में जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं। व्हाइट हाउस की ओर से यह भी कहा गया कि ट्रंप को निशाना बनाने की कोशिश करने वाले कई दुश्मन हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए जरूरत के मुताबिक अलग-अलग सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं। इस पूरे मामले ने अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नए विमान को लेकर चर्चा तेज कर दी है।



