नई दिल्ली। विदेशी फंडिंग को लेकर प्रस्तावित FCRA Amendment Bill 2026 पर जारी विवाद के बीच अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने विधेयक से जुड़ी कई आशंकाओं पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी सहायता को बंद करना नहीं, बल्कि फंड के स्रोत, इस्तेमाल और निगरानी को लेकर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है।
क्वात्रा ने सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए विधेयक से जुड़े प्रमुख दावों और सरकार के पक्ष को सामने रखा। उन्होंने उस धारणा को खारिज किया कि नए प्रावधानों से भारत में सामाजिक संगठनों या गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए विदेशी सहायता का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा। उनके अनुसार, देश में बड़ी संख्या में FCRA पंजीकृत संस्थाएं स्वास्थ्य, शिक्षा, शोध, राहत और सामाजिक कार्यों के लिए विदेशी योगदान प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि FCRA के तहत पंजीकृत संगठनों को मिलने वाला विदेशी योगदान 2010-11 में करीब 1.2 अरब डॉलर था, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 2.67 अरब डॉलर हो गया।
उनके मुताबिक देश में 30 लाख से अधिक गैर-सरकारी संगठन हैं, जबकि FCRA के तहत पंजीकृत संस्थाओं की संख्या लगभग 14,450 है। विधेयक के सबसे संवेदनशील प्रावधानों में विदेशी योगदान से तैयार संपत्तियों की निगरानी से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द होने, सरेंडर करने या नवीनीकरण नहीं होने की स्थिति में ऐसी संपत्तियों और विदेशी योगदान की निगरानी के लिए एक नामित प्राधिकरण की व्यवस्था की जा सकती है। सरकार का पक्ष है कि इसका उद्देश्य संपत्तियों को तत्काल जब्त करना नहीं है। पंजीकरण बहाल होने की स्थिति में संबंधित संपत्ति और अप्रयुक्त धन वापस किए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
धार्मिक स्थलों से जुड़ी संपत्तियों के मामले में भी उनकी धार्मिक प्रकृति को बनाए रखने की बात कही गई है। क्वात्रा ने उस आरोप को भी खारिज किया कि प्रस्तावित कानून किसी विशेष धर्म या समुदाय को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा कि FCRA के नियम सभी पात्र संगठनों पर समान रूप से लागू होते हैं। हालांकि, विपक्ष और कुछ संस्थाओं ने संपत्ति संबंधी प्रावधानों को लेकर चिंता जताई है और इसे कार्यपालिका को व्यापक अधिकार देने वाला कदम बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी फंडिंग का नियमन केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों में भी विदेशी धन और प्रभाव से जुड़े नियम मौजूद हैं। भारत में FCRA व्यवस्था की शुरुआत 1976 में हुई थी और 2010 में इसे नए कानूनी ढांचे के साथ लागू किया गया। इसके बाद भी समय-समय पर इसमें संशोधन किए गए हैं।
FCRA Bill 2026 को लेकर अब बहस पारदर्शिता और निगरानी के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि वैध सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों पर अनावश्यक असर न पड़े। आने वाले दिनों में विधेयक के प्रावधानों को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस और तेज होने की संभावना है।



