वॉशिंगटन। अमेरिका में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ दिया। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी राजनीति में ऐसे लोग तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिन्हें उन्होंने ‘जिहादी’ और ‘साम्यवादी’ मानसिकता वाला बताया। उनके बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
ट्रंप ने कहा कि देश के कई हिस्सों में उनकी नजर ऐसे राजनीतिक उम्मीदवारों पर है, जिन्हें वह अमेरिकी व्यवस्था के लिए खतरनाक मानते हैं। उन्होंने अपने विरोधियों की नीतियों और विचारधारा पर सवाल उठाते हुए उन पर देश की मौजूदा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। राष्ट्रपति ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के अलावा अमेरिका में रहने वाले प्रवासी समुदायों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने विशेष रूप से सोमाली मूल के लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ ऐसे लोग, जो दूसरे देशों से अमेरिका आए हैं, अब अमेरिकी व्यवस्था और शासन को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
ट्रंप की इस टिप्पणी पर प्रवासी समुदायों और उनके समर्थकों की ओर से नाराजगी जताई जा रही है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को निशाना बनाना जारी रखा। उन्होंने मिशिगन सीनेट के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सैयद से जुड़ी तस्वीरें और पोस्ट साझा कर उनके राजनीतिक रुख पर सवाल उठाए। इनमें एल-सैयद और उनकी पत्नी की तस्वीरों को ट्रंप तथा उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप की तस्वीरों के साथ जोड़कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई।
एल-सैयद ने ट्रंप के हमले का जवाब देते हुए उन पर विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि ऐसे बयानों के जरिए असल मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अपने अभियान को लोगों के अधिकारों और रोजमर्रा की समस्याओं से जोड़ने की बात कही। इस विवाद में रिपब्लिकन पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के बयान भी चर्चा में हैं। अलबामा के सीनेटर टॉमी ट्यूबरविल ने एल-सैयद की राजनीतिक विचारधारा पर सवाल उठाए, जबकि दक्षिण कैरोलिना की सांसद नैन्सी मेस ने भी मुस्लिम जनप्रतिनिधियों को लेकर तीखी टिप्पणियां की हैं।
अमेरिका में होने वाले आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले डेमोक्रेट और रिपब्लिकन नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप का ताजा हमला इसी बढ़ते चुनावी संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में प्रवासी समुदाय, राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक विचारधारा जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।



