भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की गंगापुर नगर पालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर मचा सियासी घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए राजस्थान महिला कांग्रेस ने भीलवाड़ा शहर महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और वार्ड 23 से नवनिर्वाचित पार्षद रेखा हिरण को उनके पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह ने इस संबंध में आधिकारिक निष्कासन आदेश जारी किया है।
बगावत की वजह: अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ भरा पर्चा
गंगापुर नगर पालिका के कुल 25 वार्डों में से कांग्रेस ने 14 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट और मजबूत बहुमत हासिल किया था। पार्टी संगठन ने सर्वसम्मति से प्रीति काकाणी को अध्यक्ष पद का आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था।
हालांकि, पार्टी के फैसले से नाखुश होकर रेखा हिरण ने निर्दलीय के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया। नामांकन वापसी के अंतिम दिन तक भी जब उन्होंने अपना फॉर्म वापस नहीं लिया, तो प्रदेश संगठन ने इसे खुली बगावत मानते हुए उन्हें पदमुक्त करने का फरमान जारी कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह ने साफ कहा है कि पार्टी अनुशासन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी पदाधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।


बर्खास्तगी पर छलका बागी रेखा हिरण का दर्द
कार्रवाई के बाद रेखा हिरण ने अपनी प्रतिक्रिया में संगठन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
“मैंने हमेशा पूरी निष्ठा से पार्टी की सेवा की, लेकिन बदले में मुझे पार्षद का टिकट तक नहीं दिया जा रहा था। जैसे-तैसे टिकट लाकर चुनाव जीती, तो अध्यक्ष पद पहले से किसी और के लिए तय कर दिया गया। ऐसे में निष्ठावान कार्यकर्ता कब तक चुप रहेगा? जिन नेताओं को कभी पार्टी से निकालने के लिए पत्र लिखे गए थे, आज उन्हें ही अध्यक्ष का प्रत्याशी बना दिया गया है।”
गंगापुर में अब त्रिकोणीय मुकाबला, क्रॉस वोटिंग का डर
रेखा हिरण के मैदान में डटे रहने से गंगापुर नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव बेहद रोमांचक और पेचीदा मोड़ पर पहुंच गया है। अब मुकाबला इन तीन चेहरों के बीच है:
- प्रीति काकाणी — कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी
- विंकल सिंघवी — भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रत्याशी
- रेखा हिरण — बागी निर्दलीय प्रत्याशी
बीजेपी की नजरें सधीं: भले ही 14 पार्षदों के साथ कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन रेखा हिरण के मैदान में रहने से पार्षदों के बंटने और क्रॉस वोटिंग की पूरी आशंका बन गई है। कांग्रेस के इस अंदरूनी घमासान का सियासी फायदा उठाने के लिए बीजेपी भी पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है और असंतुष्ट पार्षदों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।



