नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी वकीलों, कथित फर्जी कानून की डिग्रियों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़ी गतिविधियों की जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में केंद्र, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और केंद्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस जारी किया है।
यह याचिका अधिवक्ता राजा चौधरी ने दायर की है। इसमें कथित तौर पर फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत करने वाले लोगों और ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। याचिका में फर्जी वकीलों के नेटवर्क तथा कानून की जाली डिग्रियों से जुड़े आरोपों की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है। मामले का एक दूसरा पहलू सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों के ऑनलाइन प्रसार से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मई में अदालत की सुनवाई के दौरान की गई कुछ टिप्पणियों को संदर्भ से अलग करके वीडियो, मीम्स और अन्य डिजिटल सामग्री के रूप में प्रसारित किया गया। इसके बाद इनका इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार, ब्रांडिंग और कथित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किए जाने का आरोप लगाया गया है।
दरअसल, मई में एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कथित फर्जी डिग्री रखने वाले लोगों और पेशे में प्रवेश को लेकर चिंता व्यक्त की थी। इसी दौरान ‘कॉकroach’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। बाद में इस टिप्पणी को लेकर कई तरह की व्याख्याएं सामने आईं। इसी घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकroach जनता पार्टी’ नाम से एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान सामने आया। इस नाम का इस्तेमाल डिजिटल पोस्ट, वीडियो और राजनीतिक गतिविधियों में किया गया। याचिका में इस अभियान से जुड़ी गतिविधियों की भी जांच की मांग की गई है।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य न्यायपालिका की आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य या संविधान के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर रोक लगाना नहीं है। याचिका में मुख्य आपत्ति कथित तौर पर अदालत की मौखिक टिप्पणियों को संदर्भ से अलग कर व्यावसायिक या राजनीतिक इस्तेमाल किए जाने को लेकर है।
अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र और संबंधित संस्थाओं का जवाब इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा। अदालत के समक्ष फर्जी वकीलों और कथित डिजिटल व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े दोनों पहलुओं पर आगे सुनवाई होगी।



