Wednesday, August 12, 2026
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सार्वजनिक पूंजी निजी निवेश का विकल्प नहीं, उसे बढ़ाने का माध्यम बने: निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकारी निवेश निजी क्षेत्र की जगह लेने के बजाय उसे बढ़ावा देने वाला होना चाहिए। सरकार सड़क, रेल, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचे में निवेश कर निजी निवेश के लिए माहौल तैयार कर रही है। उन्होंने स्थिर नीतियों, पारदर्शिता और निवेशकों के भरोसे को जरूरी बताया। सार्वजनिक-निजी भागीदारी, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण और बहुपक्षीय संस्थानों की मदद से बड़े निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार की ओर से किया जाने वाला सार्वजनिक निवेश निजी क्षेत्र के निवेश का विकल्प नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे बढ़ावा देने का काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र, दोनों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं में सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। सार्वजनिक पूंजी के जरिए सड़क, रेल, ऊर्जा और अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा सकता है। इससे निजी क्षेत्र के लिए निवेश के नए अवसर तैयार होते हैं और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं तैयार करना है, जिससे निजी निवेशकों के लिए परियोजनाओं में भाग लेना आसान हो। इसके लिए परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ाने, जोखिम कम करने और निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक और निजी निवेश के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी खर्च के भरोसे अर्थव्यवस्था की निवेश जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता। निजी पूंजी को आकर्षित करने के लिए स्थिर नीतियां, पारदर्शी व्यवस्था और निवेशकों का भरोसा जरूरी है। वित्त मंत्री के अनुसार, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सरकार द्वारा शुरुआती निवेश किए जाने से निजी क्षेत्र के लिए आगे निवेश का रास्ता खुलता है। इस तरह सार्वजनिक पूंजी एक उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकती है और बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित कर सकती है।

उन्होंने विभिन्न सरकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि परियोजनाओं को आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य बनाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इनमें व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और बुनियादी ढांचा निवेश से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। वित्त मंत्री ने बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान परियोजनाओं से जुड़े जोखिम को कम करने और निजी निवेश जुटाने में मदद कर सकते हैं। विकासशील देशों में बड़े बुनियादी ढांचा निवेश की जरूरत को देखते हुए यह व्यवस्था और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में सार्वजनिक निवेश आधार तैयार कर सकता है, लेकिन आगे की गति निजी क्षेत्र की भागीदारी से ही मजबूत होगी। सरकार का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें दोनों क्षेत्रों की पूंजी मिलकर आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करे।

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