वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नाटो देशों के रक्षा खर्च को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि अमेरिका लंबे समय से गठबंधन की सुरक्षा पर सबसे अधिक आर्थिक बोझ उठा रहा है। उन्होंने दावा किया कि रक्षा व्यय के मामले में अमेरिका का योगदान अन्य सदस्य देशों की तुलना में कहीं अधिक है, जबकि इसके बदले उसे अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। ट्रंप के इस बयान के बाद नाटो के भीतर रक्षा खर्च और सदस्य देशों की जिम्मेदारियों को लेकर बहस तेज हो गई है।
ट्रंप का कहना है कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अधिक संसाधन खर्च करने चाहिए, ताकि पूरे गठबंधन की जिम्मेदारी केवल अमेरिका पर न रहे। उनका मानना है कि सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है, जब सभी सदस्य देश अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार रक्षा क्षेत्र में पर्याप्त निवेश करें। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से अमेरिका ने सबसे अधिक वित्तीय योगदान दिया है, जबकि कई देशों का योगदान अपेक्षाकृत कम रहा है। हालांकि रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कुल खर्च के आधार पर तुलना करना पूरी तस्वीर पेश नहीं करता। प्रत्येक देश का रक्षा बजट उसकी आर्थिक स्थिति, सैन्य जरूरतों और वैश्विक जिम्मेदारियों के अनुसार तय होता है।
अमेरिका का सैन्य बजट केवल नाटो तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक और सुरक्षा आवश्यकताओं पर भी खर्च करता है। इसलिए सीधे तौर पर सभी देशों के रक्षा बजट की तुलना करना पूरी तरह उचित नहीं माना जाता। हाल के वर्षों में कई यूरोपीय देशों ने अपने रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। रूस-यूक्रेन संघर्ष और बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के बाद अनेक सदस्य देशों ने सैन्य आधुनिकीकरण और रक्षा तैयारियों पर अधिक निवेश शुरू किया है। इसके बावजूद अमेरिका लगातार यह मांग करता रहा है कि सभी सहयोगी देश रक्षा खर्च बढ़ाकर गठबंधन की सामूहिक क्षमता को और मजबूत करें।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान आगामी नाटो बैठकों और सदस्य देशों के बीच होने वाली चर्चाओं को प्रभावित कर सकता है। रक्षा खर्च का मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच प्रमुख विषय रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सदस्य देश रक्षा निवेश को लेकर किस प्रकार की नई रणनीति अपनाते हैं और गठबंधन के भीतर जिम्मेदारियों के संतुलन को लेकर क्या सहमति बनती है। फिलहाल ट्रंप के ताजा बयान ने नाटो की वित्तीय संरचना और सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।



