वॉशिंगटन। अमेरिका में एच-1बी वीजा के जरिए विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। टेक्सास के रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने टेक्सास स्टेट यूनिवर्सिटी में एच-1बी वीजाधारक कर्मचारी का अनुबंध नवीनीकृत किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी नागरिकों और कर्मचारियों को नियुक्ति का पर्याप्त अवसर दिया गया था या नहीं।
मामला ऐसे समय सामने आया है, जब टेक्सास सरकार सार्वजनिक संस्थानों में नए एच-1बी आवेदन को लेकर पहले ही सख्त रुख अपना चुकी है। राज्य सरकार ने राज्य एजेंसियों और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में नए एच-1बी वीजा आवेदन पर रोक लगाने का फैसला किया है, जो 31 मई 2027 तक प्रभावी रहने वाला है। हालांकि, यह रोक पहले से एच-1बी वीजा पर काम कर रहे कर्मचारियों की नौकरी खत्म करने से संबंधित नहीं है।
विदेशी कर्मचारी के अनुबंध पर उठाए सवाल
चिप रॉय ने टेक्सास स्टेट यूनिवर्सिटी को भेजे पत्र में एच-1बी कार्यक्रम के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है। उनका सवाल है कि जिस कर्मचारी का अनुबंध आगे बढ़ाया गया, उसके पद के लिए विश्वविद्यालय ने अमेरिकी नागरिकों और योग्य अमेरिकी कर्मचारियों को भर्ती करने के लिए क्या प्रयास किए।
रॉय के अनुसार, यह स्पष्ट होना चाहिए कि विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने के पीछे उसकी विशेष योग्यता और विशेषज्ञता मुख्य कारण थी या अमेरिकी उम्मीदवारों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय से वित्तीय वर्ष 2020 से अब तक एच-1बी कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी भी मांगी है।
सांसद ने एच-1बी वीजाधारकों की संख्या, वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या, उनके वेतन और उनके पास मौजूद विशेष कौशल से संबंधित विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। इसके अलावा उन्होंने अमेरिकी नागरिकों की भर्ती के लिए प्रकाशित पदों और एच-1बी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ी प्रक्रिया की भी जानकारी मांगी है।
एच-1बी व्यवस्था पर बढ़ रहा राजनीतिक दबाव
चिप रॉय लंबे समय से एच-1बी कार्यक्रम में बदलाव की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की अनदेखी न हो। उन्होंने एच-1बी व्यवस्था में सुधार के लिए एक विधेयक भी पेश किया है, जिसमें अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने और वीजा चयन प्रक्रिया में बदलाव जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
एच-1बी वीजा के मुद्दे पर अमेरिका में राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। एक ओर कंपनियां और विश्वविद्यालय इसे विशेष कौशल वाले कर्मचारियों की जरूरत पूरी करने का माध्यम बताते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ सांसदों का आरोप है कि इसका इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों के रोजगार अवसरों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
टेक्सास स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह मामला इसी व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। खास तौर पर भारतीय पेशेवरों के लिए भी इस घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं।



