कोटा। कोटा ग्रामीण में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के बीच सुल्तानपुर पंचायत समिति के वार्ड नंबर 8 से कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मीणा की हिस्ट्रीशीट खोलने का मामला सामने आया है। कोटा ग्रामीण पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर के आदेश पर सीमलिया थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, चंद्रप्रकाश मीणा के खिलाफ वर्ष 1996 से 2019 के बीच अलग-अलग मामलों में 11 मुकदमे दर्ज हुए हैं।
नामांकन के दो दिन बाद जारी हुए आदेश
चंद्रप्रकाश मीणा ने 13 अक्टूबर को पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। इसके दो दिन बाद, 15 अक्टूबर को उनकी हिस्ट्रीशीट खोलने के आदेश जारी किए गए। इसके बाद सीमलिया थाना पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस को उनके आपराधिक रिकॉर्ड और फोटो को विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने के साथ नियमित निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हत्या के प्रयास से धोखाधड़ी तक के मामले दर्ज
पुलिस के मुताबिक, कालारेवा निवासी 58 वर्षीय चंद्रप्रकाश मीणा के खिलाफ हत्या के प्रयास, मारपीट, लड़ाई-झगड़ा, राजकार्य में बाधा, धोखाधड़ी, जुआ-सट्टा और अन्य धाराओं में मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि उनकी आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने और निगरानी बनाए रखने के लिए राजस्थान पुलिस नियम, 1965 के अध्याय 4 के नियम 4.9 के तहत हिस्ट्रीशीट खोली गई है।
प्रत्याशी ने कार्रवाई को बताया राजनीतिक द्वेष
वहीं, चंद्रप्रकाश मीणा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज अधिकांश मामलों का निस्तारण हो चुका है, जबकि कुछ मामलों में न्यायालय में कार्रवाई लंबित है। उन्होंने यह भी कहा कि नामांकन फॉर्म भरने में पूरी जानकारी नहीं दे पाने के कारण कुछ विवरण छूट गए थे। मीणा ने पूरी कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा शासन के दबाव में पुलिस और प्रशासन कार्रवाई कर रहे हैं।
1996 में दर्ज हुआ था पहला मामला
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चंद्रप्रकाश मीणा के खिलाफ पहला मामला वर्ष 1996 में दर्ज हुआ था, जबकि अंतिम मामला 2019 का बताया गया है। उनके खिलाफ जानलेवा हमला, सरकारी कर्मचारी से मारपीट, अवैध प्रवेश, जबरन वसूली, लूट, डकैती, रास्ता रोकने, रंगदारी और जुआ-सट्टा सहित विभिन्न आरोपों में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
पंचायत चुनाव के दौरान हुई इस कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और प्रत्याशी के राजनीतिक द्वेष के आरोपों को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखा जाना जरूरी है।



