रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में यह कानून एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी संभव है जब इसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ जमीन पर उतारा जाए।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह अधिनियम महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने का मार्ग प्रशस्त करता है। उनके अनुसार, शासन और राजनीति में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी से नीतियां अधिक संवेदनशील और समावेशी बनेंगी, जिससे समाज के समग्र विकास को गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी कानून की सफलता केवल उसके निर्माण से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन से तय होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और समाज के सभी वर्गों से मिलकर काम करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस दिशा में समन्वय और सहयोग बेहद जरूरी है, ताकि अधिनियम के उद्देश्य पूरी तरह साकार हो सकें।
जागरूकता को इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे राज्यभर में अभियान चलाकर लोगों को इस कानून के प्रावधानों और महत्व के बारे में जानकारी दें। उन्होंने कहा कि जब तक आम जनता इस अधिनियम को समझेगी नहीं, तब तक इसके अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ पाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि विकास की आधारशिला है। जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो परिवार, समाज और राज्य सभी प्रगति करते हैं।
अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि सभी के संयुक्त प्रयासों से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा, जिससे महिलाओं को नए अवसर मिलेंगे और उनका आत्मविश्वास तथा भागीदारी दोनों मजबूत होंगे।



