जयपुर। राजस्थान में मानसून अब अपनी विदाई के मुहाने पर खड़ा है। राजधानी जयपुर में बादलों की आवाजाही कम होते ही एक बार फिर उमस और धूप की तल्खी बढ़ने लगी है। आसमान से बरसने वाले पानी के अगर पिछले ढाई दशक (25 साल) के रिकॉर्ड पर नज़र डालें, तो जयपुर में मानसून का मिजाज कभी भी एक जैसा नहीं रहा। कभी शहर और आसपास के इलाकों में इतनी बारिश हुई कि सब जलमग्न हो गया, तो कभी पूरा सीजन सूखे की चिंता में ही निकल गया। मौसम के इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर हमारे भूजल स्तर और राजधानी की लाइफलाइन माने जाने वाले बीसलपुर बांध पर पड़ता है।
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25 सालों के आंकड़े: बारिश में चार गुना तक का अंतर
केंद्रीय भूजल बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1999 से 2023 के बीच जयपुर और आसपास के इलाकों में औसतन 599.68 मिलीमीटर (मिमी) सालाना बारिश दर्ज की गई। लेकिन इस आंकड़े के भीतर बड़ा असंतुलन छिपा है:
- सबसे ज्यादा बारिश (2019): साल 2019 में जयपुर में रिकॉर्ड 956 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
- सबसे कम बारिश (2002): इसके ठीक उलट 2002 में पूरे सीजन में महज 237 मिमी पानी ही बरसा।
यानी सबसे अच्छे और सबसे खराब मानसून के बीच चार गुना से भी ज्यादा का फर्क देखने को मिला। 1999 से 2002 के दौरान जयपुर ने लगातार सूखे जैसे हालात झेले थे। हालांकि, इसके बाद 2010 (750 मिमी), 2012 (907 मिमी) और 2018 (827.1 मिमी) में बदरा जमकर बरसे, जबकि 2015 और 2016 में आंकड़ा 500-530 मिमी के आसपास ही सिमट गया। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि जयपुर में एक-दो साल की अच्छी बारिश के बाद कमजोर मानसून आना कोई नई बात नहीं है।
2025 में रिकॉर्ड तोड़ बदरा, लेकिन 2026 में थम गई चाल
राजस्थान में पिछले साल और इस साल के मानसून में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला है:
- 2025 का मानसूनी रिकॉर्ड: बीता साल (2025) पूरे राजस्थान के लिए ऐतिहासिक रहा। जून से सितंबर के बीच प्रदेश में 715.9 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य (435.6 मिमी) से करीब 64% ज्यादा थी। यह 1901 के बाद से अब तक का दूसरा सबसे भीगा हुआ मानसून साबित हुआ था।
- 2026 में फीकी पड़ी रफ्तार: इसके ठीक उलट इस साल 2026 में मानसून की चाल शुरू से ही सुस्त रही। सितंबर की शुरुआत तक राजस्थान में सामान्य से करीब 21% कम बारिश दर्ज की गई। 3 सितंबर तक जहां प्रदेश में औसतन 374.55 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 295.30 मिमी ही पानी बरसा।
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बीसलपुर बांध का गणित: पिछले साल जुलाई में छलका, इस बार 74% पर अटका
मानसून की इस बेवफाई का सबसे बड़ा झटका बीसलपुर बांध को लगा है, जिससे जयपुर, अजमेर और टोंक जिलों की प्यास बुझती है।
- जुलाई 2025 की स्थिति: पिछले साल बारिश इतनी जबरदस्त थी कि जुलाई 2025 में ही बीसलपुर बांध अपनी कुल क्षमता तक भरकर छलक गया था और इसके गेट खोलने पड़े थे।
- सितंबर 2026 का हाल: इस बार सितंबर का महीना बीतने को है, लेकिन 18 सितंबर तक बांध का जलस्तर 314.05 आरएल मीटर ही दर्ज किया गया। बांध फिलहाल अपनी कुल भराव क्षमता का करीब 73.98 प्रतिशत ही भर सका है। कैचमेंट एरिया में छिटपुट बारिश से इसमें महज 1-2 सेंटीमीटर की ही मामूली बढ़ोतरी हुई है।
जयपुर के लिए क्यों अहम है यह अंतर?
जयपुर जैसे बड़े शहर के लिए मानसून का अच्छा होना सिर्फ तात्कालिक गर्मी या पानी की किल्लत से राहत पाना भर नहीं है। बीसलपुर में पानी का पर्याप्त भराव और अच्छी बारिश शहर के गिरते भूजल स्तर (Groundwater Recharge) को सहारा देती है। अगर इस बार मानसून के आखिरी दिनों में अच्छी आवक नहीं हुई, तो आने वाले गर्मी के दिनों में जयपुरवासियों को पानी के बड़े संकट से जूझना पड़ सकता है।



