भरतपुर। बिहार कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी और खगड़िया के एसपी भानु प्रताप सिंह का पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक होकर पुलिस थाने तक पहुंच गया है। 10 साल पहले परिजनों की मर्जी के खिलाफ लव मैरिज करने वाली पत्नी पूजा जब झुंझुनूं से अपने ससुराल भरतपुर पहुंचीं, तो वहां उनके लिए दरवाजे ही नहीं खोले गए। पति और ससुराल वालों पर 6 साल की बेटी को छीनने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए पीड़िता देर रात तक भरतपुर के मथुरा गेट थाने में न्याय की गुहार लगाती रही।
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लव मैरिज से IPS बनने तक का सफर, फिर शुरू हुआ कलह
झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी (तिवारी का वास) की रहने वाली पूजा ने बताया कि वर्ष 2015 में उनकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी निवासी भानु प्रताप सिंह से हुई थी। 16 जनवरी 2016 को दोनों ने परिजनों की इच्छा के खिलाफ जाकर प्रेम विवाह किया था। पति के संघर्ष के दिनों में पूजा ने भरतपुर के एक निजी स्कूल में 5 सालों तक शिक्षिका के रूप में काम कर घर संभाला। भानु प्रताप ने हिंदी साहित्य से यूपीएससी की परीक्षा दी और वर्ष 2018 से 2020 के बीच लगातार तीन बार सफलता हासिल कर आईपीएस बने। लेकिन अधिकारी बनने के कुछ समय बाद ही दोनों के रिश्तों में खटास आने लगी।

ससुराल और ननद के घर नहीं खुला दरवाजा
पूजा का आरोप है कि पति भानु प्रताप उनकी 6 साल की मासूम बेटी को उनसे दूर कर भरतपुर ले आए थे। जब पूजा अपने पति के परिवार के किराए के मकान (गीता कॉलोनी) पहुंचीं, तो करीब एक घंटे तक गुहार लगाने के बाद भी परिजनों ने गेट नहीं खोला। इसके बाद वह विजय नगर स्थित अपनी ननद के घर गईं, लेकिन वहां भी उनके लिए दरवाजे बंद रहे।
निराश होकर पूजा मथुरा गेट पुलिस थाने पहुंचीं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने पूर्व में फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास भी किया था, जिसके बाद उन्हें पटना के आईजीआईएमएस में भर्ती कराना पड़ा था। पूजा का कहना है, “मेरे पास न पैसा है और न पावर। मैं सिर्फ अपना परिवार बचाना चाहती हूं और अपनी बेटी को पाना चाहती हूं।”
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एसपी का वायरल ऑडियो और पुलिस का रुख
कुछ दिनों पहले आईपीएस भानु प्रताप सिंह का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें वह अपनी तबीयत खराब होने और न्यायालय में तलाक की अर्जी लंबित होने की बात कह रहे थे। वायरल ऑडियो में उन्होंने बैठकों के जरिए बातचीत से रास्ता निकालने की इच्छा जताई थी।
वहीं इस पूरे मामले में थानाधिकारी (SHO) हरलाल का कहना है कि यह मामला पूरी तरह पारिवारिक और न्यायालय से जुड़ा हुआ है। पुलिस सीधे तौर पर बेटी की कस्टडी नहीं दिला सकती। हालांकि, मानवीय आधार पर मां और बेटी की आमने-सामने मुलाकात कराने की कोशिश की जाएगी और बच्ची की इच्छा के मुताबिक आगे का फैसला कोर्ट के जरिए होगा।



