अजमेर: राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Elections) की तैयारियों के बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अजमेर में एक बहुत बड़ा सियासी झटका लगा है। अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर (Mayor) और भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ नागौर जिला प्रभारी पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह केवल एक प्रशासनिक इस्तीफा नहीं है, बल्कि इसके पीछे भाजपा के दो दिग्गज नेताओं के बीच सालों से सुलग रही सियासी खींचतान का बड़ा विस्फोट है। गहलोत ने बाकायदा एक वीडियो संदेश जारी कर सीधे तौर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर सत्ता और प्रभाव का दुरुपयोग कर प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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‘मैं मिट सकता हूँ, लेकिन झुकूँगा नहीं’: गहलोत का तीखा वीडियो संदेश
इस्तीफे के साथ ही धर्मेंद्र गहलोत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनका बेहद आक्रामक और चुनौती भरा अंदाज़ देखने को मिल रहा है। वीडियो में गहलोत ने कहा:
“देवनानी जी… आपने शायद मुझे पहचाना नहीं। मैं वीर कुमार जी का चेला हूँ… जो किसी के सामने कभी झुका नहीं। धर्मेंद्र गहलोत मिटने को तैयार है, लेकिन आपके सामने झुकने को कतई तैयार नहीं है। आपके और मेरे बीच की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।”
गहलोत का आरोप है कि स्वायत्त शासन विभाग (DLB) की ओर से उन्हें वर्ष 2015 से 2020 और 2021 के पुराने मामलों में जो प्रशासनिक नोटिस भेजे गए हैं, वे पूरी तरह से वासुदेव देवनानी के राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों के दबाव में जारी करवाए गए हैं।
‘पार्टी को नुकसान न हो, इसलिए भारी मन से ले रहा हूँ फैसला’
गहलोत ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा कि वे भाजपा के सच्चे और निष्ठावान सिपाही रहे हैं। वे नहीं चाहते कि इस पूरे प्रकरण का गलत फायदा विपक्षी दल कांग्रेस उठाए या पार्टी की साख पर कोई आंच आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इन मामलों का पूरा निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक वे भारी मन से पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से खुद को अलग रख रहे हैं।
दूसरी ओर, जब इस पूरे विवाद पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही संक्षिप्त और दो टूक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि— “मेरा किसी से भी कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक मतभेद नहीं है।”
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क्या है पूरा मामला जिसने बढ़ाई गहलोत की मुश्किलें?
यह पूरा विवाद अजमेर नगर निगम के पुराने कार्यकाल की फाइलों से जुड़ा है। मामला उस समय का है जब नगर निगम आयुक्त के अवकाश पर रहने के दौरान तत्कालीन महापौर धर्मेंद्र गहलोत के माध्यम से 13 फाइलों के भवन मानचित्र (नक्शे) पास किए गए थे:
- न्यायिक जांच व नोटिस: इस मामले में हुई न्यायिक जांच में गहलोत को दोषी माना गया था।
- ACB की कार्रवाई: वर्ष 2019 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जांच शुरू की थी, लेकिन तब अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली थी। अब राज्य सरकार ने एसीबी को जांच आगे बढ़ाने के लिए अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी है।
- चुनाव लड़ने पर रोक का खतरा: स्वायत्त शासन विभाग ने न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर गहलोत को नोटिस थमाते हुए 3 दिन में जवाब मांगा है। नोटिस में पूछा गया है कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के तहत उन्हें 6 साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित क्यों न कर दिया जाए।
कांग्रेस ने बोला हमला: ‘अपनी ही पार्टी के नेताओं को डरा रही है भाजपा’
अजमेर भाजपा में मचे इस घमासान के सामने आते ही विपक्षी पार्टी कांग्रेस पूरी तरह हमलावर हो गई है:
- डॉ. राजकुमार जयपाल (शहर कांग्रेस अध्यक्ष): उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का असली चेहरा अब सामने आ चुका है। जो पार्टी अपने ही वरिष्ठ नेताओं, वकीलों और पूर्व जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित कर रही हो, वह आम जनता के अधिकारों की रक्षा क्या करेगी।
- धर्मेंद्र राठौड़ (पूर्व आरटीडीसी चेयरमैन): उन्होंने कहा कि यह वीडियो भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र, तानाशाही रवैये और असंतोष की परतें खोलता है। अपने ही साथियों को निशाने पर लेना भाजपा के असली चरित्र को दर्शाता है।
- विवेक पाराशर (कांग्रेस उपाध्यक्ष): उन्होंने धर्मेंद्र गहलोत को अपना वकील साथी बताते हुए कहा कि इस अन्याय और उत्पीड़न की घड़ी में कांग्रेस उनके साथ खड़ी है और उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
निकाय चुनावों से ठीक पहले अजमेर में उभरा यह अंदरूनी कलह भाजपा के लिए आने वाले दिनों में बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है।



