इस्लामाबाद/रावलपिंडी: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की सेहत और उनकी रिहाई को लेकर जारी सियासी घमासान में एक नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के अनुपालन में गुरुवार देर रात इमरान खान को रावलपिंडी की अडियाला जेल से निकाल कर कड़ी सुरक्षा के बीच इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल लाया गया था। हालांकि, शुक्रवार तड़के 6 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा की गई गहन मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता से इनकार कर दिया और उन्हें जेल परिसर में ही रखना सुरक्षित बताया। इसके तुरंत बाद पूर्व प्रधानमंत्री को भारी सुरक्षा घेरे में वापस अडियाला जेल की सेल में स्थानांतरित कर दिया गया।
अस्पताल में उनके आगमन से पहले सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। परिसर के आसपास 800 से अधिक पुलिसकर्मियों और रेंजरों को तैनात किया गया था। गोपनीयता और सुरक्षा कारणों से अस्पताल के कई हिस्सों की लाइटें बंद कर दी गईं, वहां मौजूद स्टाफ के मोबाइल फोन जमा करवा लिए गए और मीडियाकर्मियों को बाहर ही रोक दिया गया।
यह खबर भी पढ़ें:-हूतियों का सऊदी अरब पर ड्रोन हमला, नजराने एयरपोर्ट और अरामको ठिकाने को बनाया निशाना
सरकार की रीव्यू पिटीशन खारिज, वकीलों ने लगाया मुलाकात रोकने का आरोप
इमरान खान को प्राइवेट अस्पताल भेजने के शीर्ष अदालत के फैसले से शहबाज सरकार असहज नजर आ रही है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल कर इस आदेश को वापस लेने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ऑफिस ने आवश्यक दस्तावेजों का पूरा सेट न होने की तकनीकी कमी बताते हुए सरकार की याचिका को लौटा दिया।
वहीं दूसरी ओर, इमरान खान के कानूनी दल में भारी रोष है। उनके वकील खालिद यूसुफ चौधरी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की समय सीमा बीत जाने के बावजूद अडियाला जेल प्रशासन ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने की इजाजत नहीं दी। चौधरी के अनुसार, वे सुप्रीम कोर्ट में इलाज को लेकर अवमानना याचिका दायर करने के लिए इमरान खान के दस्तखत लेने पहुंचे थे, लेकिन प्रशासन ने जानबूझकर उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद लीगल टीम अदालत में अवमानना याचिका पेश करने पर अड़ी हुई है।
आर्मी चीफ मुनीर की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव
पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर इमरान खान को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव ला रहे हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा नाम और जेमिमा गोल्डस्मिथ से विवाह जैसे बैकग्राउंड के कारण इमरान खान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी प्रभाव है। अमेरिकी कांग्रेस और ब्रिटिश संसद के 35 से अधिक सांसद इमरान खान की मानवाधिकार सुरक्षा और रिहाई के लिए औपचारिक आवाज उठा चुके हैं।
लगभग तीन साल से सलाखों के पीछे रहने के कारण सैन्य प्रतिष्ठान अब इमरान को सीधा बड़ा खतरा नहीं मान रहा है, और चर्चाएं हैं कि इमरान खान भी सेना के खिलाफ बयानबाजी न करने के संकेत दे रहे हैं।
यह खबर भी पढ़ें:-IIT छोड़कर घर से निकले, सड़कों पर गुजारी रातें, फिर राजस्थान के पहले एरिना ग्रैंडमास्टर बने
स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और सुप्रीम कोर्ट का मेडिकल बोर्ड
अदालत में दाखिल हालिया मेडिकल रिपोर्ट्स में 73 वर्षीय पूर्व पीएम की सेहत को लेकर कई गंभीर खुलासे हुए हैं:
- ब्लड प्रेशर व दिल की धड़कन: रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान का ब्लड प्रेशर 140/80 तक पहुंच गया है, जो पहले 120/80 (सामान्य) रहता था। उनकी पल्स रेट 54 प्रति मिनट दर्ज की गई है और वे सीने में भारीपन व चिंता से जूझ रहे हैं।
- आंखों की रोशनी का मुद्दा: इससे पहले उनकी दाहिनी आंख की रोशनी में भी गिरावट की खबरें सामने आई थीं, जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता जताई गई थी।
इन तथ्यों को देखते हुए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है। इसमें इमरान खान की बहन डॉ. उजमा खान और उनके व्यक्तिगत चिकित्सक डॉ. फैसल सुल्तान भी शामिल होंगे। यह बोर्ड तय करेगा कि पूर्व पीएम के शरीर में ब्लड क्लॉट या अन्य खतरों का इलाज जेल में संभव है या उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना ही एकमात्र रास्ता है।
अगस्त 2023 से जेल में बंद इमरान: जानिए प्रमुख केसों का स्टेटस
अगस्त 2023 में पहली बार तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार हुए इमरान खान तब से लगातार जेल में हैं। पीटीआई का स्पष्ट आरोप है कि 2022 में अविश्वास प्रस्ताव से सरकार गिरने के बाद उनके खिलाफ दर्ज तमाम मामले राजनीति से प्रेरित हैं ताकि उन्हें चुनाव प्रक्रिया से दूर रखा जा सके।
मुख्य मामलों की वर्तमान स्थिति:
- तोशाखाना केस: पहली सजा निलंबित होने के बाद, सरकारी तोहफों की खरीद-फरोख्त से जुड़े एक अन्य तोशाखाना केस में उन्हें और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को सजा सुनाई गई थी, जिस पर कानूनी अपील जारी है।
- साइफर (स्टेट सीक्रेट्स) केस: इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा को रद्द करते हुए जून 2024 में इमरान खान को पूरी तरह बरी कर दिया था।
- इद्दत निकाह केस: जुलाई 2024 में अदालत ने इमरान खान और बुशरा बीबी दोनों को इस मामले से बरी कर दिया।
- अल-कादिर ट्रस्ट (£190 मिलियन) मामला: ब्रिटेन से लौटाई गई रकम में कथित गबन के इस मामले में सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सजा निलंबन की याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं और मुख्य अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
आगामी दिनों में मेडिकल बोर्ड की अंतिम रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख ही तय करेगा कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में रहेंगे या फिर किसी अस्पताल में उनका लंबे समय तक इलाज चलेगा।



