Thursday, August 20, 2026
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IIT छोड़कर घर से निकले, सड़कों पर गुजारी रातें, फिर राजस्थान के पहले एरिना ग्रैंडमास्टर बने

उदयपुर के चंद्रजीत सिंह राजावत ने आईआईटी छोड़कर शतरंज को करियर बनाया और परिवार की नाराजगी के बाद घर छोड़कर दिल्ली चले गए। आर्थिक तंगी के दौरान उन्होंने रेलवे स्टेशन, स्टेडियम और सड़कों पर रातें बिताईं, लेकिन शतरंज नहीं छोड़ा। मेहनत के दम पर वह राजस्थान के पहले एरिना ग्रैंडमास्टर बने और अब उदयपुर में शतरंज अकादमी चलाकर नई प्रतिभाओं को तैयार कर रहे हैं।

उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर के चंद्रजीत सिंह राजावत की कहानी संघर्ष और जुनून की मिसाल है। आईआईटी में दाखिले का मौका मिलने के बावजूद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर शतरंज को अपना करियर बनाने का फैसला किया। परिवार की नाराजगी के बाद वह घर छोड़कर दिल्ली चले गए। शुरुआती दिनों में उनके पास रहने का स्थायी ठिकाना नहीं था और कई बार रेलवे स्टेशन, स्टेडियम और यहां तक कि सड़कों पर रात गुजारनी पड़ी। आज वह राजस्थान के पहले एरिना ग्रैंडमास्टर (एजीएम) के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।

क्रिकेट से शतरंज तक का सफर

चंद्रजीत का शुरुआती लगाव क्रिकेट से था और वह जिला स्तर पर क्रिकेट खेलते थे। बाद में कंप्यूटर गेम के जरिए उनकी रुचि शतरंज में बढ़ी। करीब 16 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार शतरंज प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। धीरे-धीरे खेल के प्रति उनका जुनून इतना बढ़ गया कि उन्होंने इसे ही अपना भविष्य बनाने का फैसला कर लिया।

उन्होंने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल की थी। परिवार चाहता था कि वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करें, लेकिन चंद्रजीत ने आईआईटी में दाखिला नहीं लिया। इस फैसले के बाद घर में विवाद बढ़ा और आखिरकार वह दिल्ली चले गए।

दिल्ली में संघर्ष भरे दिन

दिल्ली पहुंचने के बाद शतरंज के प्रति उनका जुनून तो मजबूत था, लेकिन आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए उन्हें सीमित पैसों में सफर करना पड़ता था। रहने की व्यवस्था नहीं होने पर उन्होंने कई बार रेलवे स्टेशन, स्टेडियम और अन्य सार्वजनिक जगहों पर रात गुजारी।

मुश्किलों के बावजूद उन्होंने टूर्नामेंट खेलना नहीं छोड़ा। एक प्रतियोगिता के दौरान देर से पहुंचने और बेहद कम समय बचने के बावजूद उन्होंने मुकाबला जीत लिया। इस तरह के अनुभवों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें भरोसा हुआ कि वह शतरंज में आगे बढ़ सकते हैं।

राजस्थान के पहले एरिना ग्रैंडमास्टर

लगातार मेहनत के बाद चंद्रजीत ने एरिना ग्रैंडमास्टर की उपाधि हासिल की। वह राजस्थान के पहले खिलाड़ी बने जिन्हें यह खिताब मिला। अपने करियर में उन्होंने कई अनुभवी और ऊंची रेटिंग वाले खिलाड़ियों को भी हराया।

शतरंज के सफर में उनकी मुलाकात कई ऐसे खिलाड़ियों से हुई जो आगे चलकर विश्व स्तर पर पहचान बनाने में सफल रहे। इनमें भारतीय शतरंज के बड़े नाम गुकेश, आर. प्रज्ञानानंद और निहाल सरीन भी शामिल हैं।

खिलाड़ी से बने प्रशिक्षक

शतरंज के साथ-साथ चंद्रजीत ने प्रशिक्षण देना भी शुरू किया। दिल्ली में उन्होंने कई बच्चों को शतरंज सिखाया। वर्ष 2019 में वह उदयपुर वापस लौटे और किंगडम ऑफ चेस नाम से शतरंज अकादमी शुरू की।

उनकी अकादमी से जुड़े कई खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया और पदक हासिल किए।

उदयपुर को शतरंज के नक्शे पर लाने की कोशिश

चंद्रजीत राजावत अब सिर्फ अपने करियर तक सीमित नहीं हैं। वह उदयपुर में शतरंज को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को तैयार करने के लिए काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य शहर में ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां बच्चों को शुरुआती स्तर से ही बेहतर शतरंज प्रशिक्षण मिल सके।

आईआईटी की पढ़ाई का रास्ता छोड़ने से लेकर घर से निकलने, सड़कों और स्टेशनों पर रातें गुजारने और फिर राजस्थान के पहले एरिना ग्रैंडमास्टर बनने तक चंद्रजीत का सफर बताता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य के प्रति लगातार मेहनत की जाए तो सफलता हासिल की जा सकती है।

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