Thursday, August 20, 2026
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जयपुर में बवाल! विधानसभा के गेट पर चढ़े कांग्रेस विधायक, पुलिस से तीखी धक्का-मुक्की, जानिए क्या है पूरा मामला

राजस्थान विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही जयपुर में जमकर हंगामा हुआ। सरकारी स्कूलों में मीडिया एंट्री और फोटो-वीडियो बैन के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने प्रदर्शन किया और विधानसभा बैरिकेड्स पर चढ़ गए। जानिए पूरा मामला और सरकार का रुख।

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजधानी जयपुर में बड़ा राजनीतिक संग्राम छिड़ गया। सरकारी स्कूलों में मीडिया, बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश और फोटो-वीडियो बनाने पर रोक लगाने वाले शिक्षा विभाग के नए आदेश को लेकर विपक्ष (कांग्रेस) पूरी तरह हमलावर हो गया है। सड़क से लेकर सदन तक इस फैसले का पुरजोर विरोध देखने को मिल रहा है।

पोद्दार स्कूल से शुरू हुआ विवाद

विरोध की शुरुआत जयपुर के प्रसिद्ध आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर स्कूल से हुई। हाल ही में इस स्कूल की जर्जर व्यवस्थाओं को लेकर मूक-बधिर बच्चों ने खुद प्रदर्शन किया था। जब कांग्रेस विधायक स्कूल की जमीनी हकीकत और व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे, तो उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया। इसके बाद माहौल गरमा गया और कांग्रेस नेताओं ने सीधे विधानसभा की ओर पैदल मार्च शुरू कर दिया।

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सड़कों पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: बैरिकेड्स पर चढ़े विधायक

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में विधायक अमीन कागज़ी, रफीक खान, अमित चाचाण और डूंगरराम गेदर समेत कई प्रमुख कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए विधानसभा की तरफ बढ़े।

पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट सर्किल और विद्युत भवन के पास भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस के साथ ज़बरदस्त धक्का-मुक्की हुई। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कई विधायक सुरक्षा बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गए और विधानसभा के हाडोती द्वार का ताला तोड़ने की कोशिश करने लगे।

कांग्रेस के आरोप: ‘स्कूलों की बदहाली छुपाना चाहती है सरकार’

प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने राज्य की भजनलाल सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए:

  • सच्चाई छुपाने का प्रयास: टीकाराम जूली ने कहा कि सरकारी स्कूलों में जर्जर छतें, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं। सरकार मीडिया और फोटो-वीडियो पर बैन लगाकर इस बदहाली को छुपाना चाहती है।
  • कड़े नियमों का भय: विपक्ष ने आरोप लगाया कि अगर कोई आम नागरिक या अभिभावक स्कूल की बदहाली उजागर करता है या वीडियो बनाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई और पॉक्सो एक्ट तक लगाने की धमकियां दी जा रही हैं।
  • पीसीसी चीफ का हमला: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने के बजाय इसे राजनीतिक अखाड़ा बना रही है।

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सरकार का पलटवार: ‘अनुशासन और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि’

दूसरी तरफ, राज्य सरकार और सत्ता पक्ष ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए उनके आचरण की आलोचना की है:

  • बच्चों की निजता का तर्क: सरकार का कहना है कि स्कूलों में बिना अनुमति के वीडियो बनाने, रील्स रिकॉर्ड करने और बाहरी लोगों की बेरोकटोक आवाजाही से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और उनकी सुरक्षा व निजता को खतरा रहता है।
  • सदन का अपमान: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन को लोकतंत्र विरोधी करार दिया। सरकार का कहना है कि विपक्ष को अपनी बात सदन के पटल पर रखनी चाहिए थी, न कि सड़कों पर हंगामा करके विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुँचानी चाहिए थी।

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