पटना। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब लगातार बड़ा होता जा रहा है। पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की शुरुआती मांग BPSC TRE 4.0 का नोटिफिकेशन जारी करने तक सीमित थी, लेकिन अब आंदोलन का दायरा बढ़कर 13 सूत्रीय मांगों और 5 अतिरिक्त शर्तों तक पहुंच गया है। छात्र नेताओं का कहना है कि TRE 4.0 का विज्ञापन जारी होना उनकी लड़ाई का अंत नहीं है। उनका जोर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, लंबित भर्तियों को पूरा करने, उम्र सीमा में राहत और बिहार के स्थानीय अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी है।
32,388 पदों के विज्ञापन के बाद भी जारी है आंदोलन
आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने TRE 4.0 का नोटिफिकेशन जारी करने की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया था। इसके बाद BPSC की ओर से 32,388 पदों पर शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया। हालांकि, विज्ञापन जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा को एक चरण में कराने और निगेटिव मार्किंग खत्म करने जैसी मांगें भी सामने रख दीं। इसके बाद अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े छात्र संगठनों ने अपने मुद्दों को आंदोलन में शामिल किया।
छात्रों की 13 प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की ओर से सरकार और संबंधित आयोगों के सामने कई मांगें रखी गई हैं। इनमें प्रमुख हैं:-
- TRE 4.0 में सिंगल-टियर परीक्षा कराई जाए।
- TRE 4.0 और प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षाओं से निगेटिव मार्किंग खत्म की जाए।
- बिहार की शिक्षक भर्ती और राज्य स्तरीय नौकरियों में सख्त डोमिसाइल नीति लागू की जाए।
- BSSC की लंबित स्नातक और इंटर स्तरीय भर्तियों की प्रक्रिया जल्द पूरी कर नियुक्तियां दी जाएं।
- स्कूल और कॉलेजों में लंबित लाइब्रेरियन भर्ती का नया विज्ञापन जारी किया जाए।
- 70वीं BPSC PT परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच कर परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
- पेपर लीक के खिलाफ कड़ा कानून बनाया जाए और विवादित वेंडर कंपनियों को परीक्षा प्रक्रिया से बाहर किया जाए।
- भर्ती में देरी और कोरोना काल को देखते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाए।
- बिहार पुलिस, दारोगा, सिपाही और AEDO के नए पदों पर भर्ती विज्ञापन जारी किया जाए।
- TRE-1, TRE-2 और TRE-3 के खाली पदों पर सप्लीमेंट्री रिजल्ट या वेटिंग लिस्ट जारी की जाए।
- विश्वविद्यालयों में गेस्ट टीचर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियों में UGC के 2018 नियम लागू किए जाएं।
- TRE 4.0 समेत आगामी भर्तियों में वास्तविक रिक्तियों के अनुसार सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज मामलों और FIR को वापस लेने की मांग की गई है।
अब 5 नई शर्तों से और पेचीदा हुआ आंदोलन
13 मांगों के बीच आंदोलनकारी छात्र संगठनों की ओर से पांच और मुद्दे उठाए गए हैं। इससे आंदोलन का दायरा और बढ़ गया है।
1. ‘वन कैंडिडेट, वन रिजल्ट’ की मांग
अभ्यर्थियों की मांग है कि शिक्षक भर्ती जैसी बड़ी परीक्षाओं में एक उम्मीदवार का अंतिम चयन केवल एक सीट पर हो। उनका तर्क है कि एक ही उम्मीदवार के कई जगह चयन होने से बाद में कई सीटें खाली रह जाती हैं।
2. OMR शीट और आंसर की में पारदर्शिता
छात्र चाहते हैं कि परीक्षा के तुरंत बाद उन्हें अपनी हल की गई OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा आधिकारिक आंसर की और कटऑफ भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
3. हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने BPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों के साथ कथित भेदभाव खत्म करने की मांग उठाई है।
4. संविदा कर्मियों को मिलने वाला वेटेज खत्म करने की मांग
BSSC CGL और तकनीकी पदों की भर्तियों में संविदा कर्मियों को मिलने वाले अतिरिक्त अंकों या वेटेज को समाप्त करने की मांग भी सामने आई है। छात्रों का कहना है कि इससे सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए।
5. विधानसभा घेराव का अल्टीमेटम
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का लिखित समाधान नहीं निकला तो गर्दनीबाग में जारी आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए बिहार विधानसभा के घेराव का कदम उठाया जा सकता है। इसके साथ ही अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने की बात भी कही गई है।
कई छात्र संगठन एक मंच पर
गर्दनीबाग में आंदोलन अब सिर्फ TRE 4.0 अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रह गया है। अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े छात्र संगठन भी अपनी मांगों के साथ प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी स्कॉलर्स समेत विभिन्न वर्गों के अभ्यर्थियों के आंदोलन से प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। विपक्षी दलों के नेताओं के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने से मामला और राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों को लेकर छात्रों का यह आंदोलन अब केवल एक भर्ती के नोटिफिकेशन तक सीमित नहीं है। अभ्यर्थी परीक्षा प्रणाली में बदलाव, पारदर्शिता, लंबित नियुक्तियों, उम्र सीमा और स्थानीय उम्मीदवारों से जुड़े कई मुद्दों का समाधान चाहते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार और संबंधित भर्ती आयोग इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या बातचीत के जरिए आंदोलन को खत्म करने का रास्ता निकलता है।



