नई दिल्ली। दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों और सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, चीन ने विवादित पैरासेल द्वीपसमूह के एंटीलोप रीफ पर बड़े पैमाने पर भूमि निर्माण का पहला चरण पूरा कर लिया है। करीब छह महीने से ज्यादा समय तक चले ड्रेजिंग और भूमि पुनरुद्धार के बाद यहां लगभग 6 किलोमीटर लंबा कृत्रिम भू-भाग तैयार होने की बात सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह जगह चीन के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक केंद्र बन सकती है। हालांकि, चीन ने इस निर्माण को सैन्य अड्डा बनाने से जोड़कर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
6 किलोमीटर लंबा बना कृत्रिम द्वीप
सैटेलाइट तस्वीरों में एंटीलोप रीफ पर बड़े पैमाने पर भूमि निर्माण दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, तैयार किए गए भू-भाग की लंबाई करीब छह किलोमीटर है। यहां लगभग तीन किलोमीटर लंबी सीधी तटीय पट्टी भी दिखाई दे रही है, जिसे संभावित रनवे के लिए तैयार किया गया क्षेत्र माना जा रहा है। इसके अलावा करीब 680 मीटर लंबा घाट भी बनाया गया है, जिसके सामने गहरे पानी वाला क्षेत्र मौजूद है। यहां चीनी कोस्ट गार्ड का जहाज देखे जाने की बात भी सामने आई है। द्वीप के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में कई इमारतों का निर्माण शुरू होने की जानकारी है। इनमें एक हेलीपैड भी शामिल बताया जा रहा है।
रनवे और सैन्य सुविधाओं की आशंका
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) से जुड़े विश्लेषण के अनुसार, क्षेत्र में संभावित रनवे के लिए खुदाई का काम भी शुरू हुआ है। अगर यहां पूरी तरह से आधारभूत ढांचा तैयार होता है तो यह चीन के दक्षिण चीन सागर में महत्वपूर्ण सैन्य और निगरानी केंद्रों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भविष्य में यहां रडार, निगरानी प्रणाली, मिसाइल सुविधाएं और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़ी क्षमताएं विकसित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इन संभावित सैन्य सुविधाओं की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ताइवान संघर्ष के लिहाज से क्यों अहम है एंटीलोप रीफ?
विश्लेषकों के मुताबिक, दक्षिण चीन सागर का उत्तरी हिस्सा ताइवान से जुड़े किसी संभावित सैन्य संघर्ष की स्थिति में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। एंटीलोप रीफ की स्थिति चीन को इस क्षेत्र में अपनी समुद्री और हवाई गतिविधियों का विस्तार करने में मदद कर सकती है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि भविष्य में यहां लंबी दूरी के विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों को संचालित करने के लिए सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे चीन को मुख्य भूमि से दूर अपनी सैन्य पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वियतनाम ने जताया विरोध
एंटीलोप रीफ पर चीन के निर्माण कार्य को लेकर वियतनाम पहले ही विरोध जता चुका है। बीजिंग 1974 से पैरासेल द्वीपसमूह पर नियंत्रण रखता है, जबकि वियतनाम पूरे द्वीपसमूह पर अपना संप्रभुता का दावा करता है। वियतनाम दक्षिण चीन सागर के अन्य विवादित क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। ऐसे में एंटीलोप रीफ पर चीन की नई गतिविधि दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है।
चीन इसे नागरिक गतिविधियों से जोड़ता रहा है
चीन ने इस नए निर्माण पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। चीनी सरकारी मीडिया की ओर से ऐसी गतिविधियों को नागरिक वैज्ञानिक अनुसंधान और मौसम पूर्वानुमान जैसी जरूरतों से जोड़कर पेश किया जाता रहा है। वहीं, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर भूमि निर्माण भविष्य में सैन्य उपयोग की संभावनाओं को बढ़ा सकता है।
दक्षिण चीन सागर में बढ़ रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां चीन के अलावा वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान के भी अलग-अलग क्षेत्रों पर दावे हैं। चीन पहले भी स्प्रैटली द्वीपसमूह में कई कृत्रिम द्वीपों पर सैन्य और निगरानी ढांचा विकसित कर चुका है। एंटीलोप रीफ पर नया निर्माण करीब एक दशक के अंतराल के बाद चीन की इस रणनीति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पूरा ढांचा विकसित हो जाता है तो यह दक्षिण चीन सागर में चीन की निगरानी, समुद्री पहुंच और हवाई संचालन क्षमता को मजबूत कर सकता है। साथ ही इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के लिए नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।



