जयपुर। राजस्थान में पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने EWS व्यवस्था में बदलाव और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग को लेकर बाड़मेर से पांच दिवसीय ‘सरलीकरण यात्रा’ शुरू की। यात्रा का समापन जोधपुर में हुआ। भाटी का कहना है कि मौजूदा EWS पात्रता और प्रमाण-पत्र व्यवस्था में कई ऐसी व्यावहारिक दिक्कतें हैं, जिनका असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और युवाओं पर पड़ता है। खास तौर पर उन्होंने कृषि भूमि से जुड़े मानदंड को पश्चिमी राजस्थान की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों के संदर्भ में देखने की मांग की है।
5 एकड़ जमीन के नियम पर भाटी ने उठाया सवाल
भाटी की प्रमुख आपत्तियों में EWS पात्रता से जुड़ी पांच एकड़ कृषि भूमि की शर्त भी शामिल है। उनका तर्क है कि पश्चिमी राजस्थान में जमीन का क्षेत्रफल बड़ा होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि उससे परिवार को उतनी ही आर्थिक आय भी हो रही हो। मरुस्थलीय इलाकों में जमीन की उत्पादकता, सिंचाई की उपलब्धता, स्थानीय भूमि मूल्य और उससे होने वाली वास्तविक आर्थिक उपयोगिता अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में भाटी ने मांग की है कि EWS पात्रता तय करते समय केवल जमीन का आकार देखने के बजाय इन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाए।
EWS प्रमाण-पत्र की अवधि बढ़ाने की मांग
EWS प्रमाण-पत्र को लेकर भी भाटी ने कई सुझाव रखे हैं। उनकी मांग है कि प्रमाण-पत्र की वैधता अवधि बढ़ाई जाए, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को बार-बार नई प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार की ओर से जारी EWS प्रमाण-पत्र को केंद्रीय सरकारी सेवाओं और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में मान्यता देने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि राज्य और केंद्र के लिए अलग-अलग प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया से अभ्यर्थियों को अनावश्यक परेशानी होती है।
युवाओं को उम्र और आवेदन शुल्क में राहत की मांग
भाटी ने EWS वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा और आवेदन शुल्क में उचित छूट देने की मांग भी की है। इसके साथ ही उन्होंने EWS विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, छात्रावास और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही है। उनकी मांगों में विवाहित महिला अभ्यर्थियों के दस्तावेज और आय प्रमाण से जुड़ी प्रक्रिया को आसान करना भी शामिल है। भाटी का कहना है कि अलग-अलग दस्तावेज जुटाने की मौजूदा प्रक्रिया कई मामलों में अभ्यर्थियों के लिए परेशानी का कारण बनती है।
पंचायत चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधि तेज
भाटी की यह यात्रा ऐसे समय शुरू हुई है जब राजस्थान में पंचायती राज चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। बाड़मेर से शुरू हुई यात्रा पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न इलाकों से होकर जोधपुर तक पहुंची। इस दौरान EWS व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया गया। मीडिया रिपोर्टों में इस अभियान को भाटी की राजनीतिक सक्रियता के विस्तार के संदर्भ में भी देखा गया है। हालांकि, इस यात्रा से बीजेपी और कांग्रेस के वोट बैंक पर कितना असर पड़ेगा या इसका पंचायत चुनावों पर क्या राजनीतिक प्रभाव होगा, यह अभी आकलन का विषय है।
जोधपुर में देर रात तक जुटे समर्थक
यात्रा के समापन से जुड़े कार्यक्रम को लेकर भी काफी चर्चा हुई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जोधपुर के हनुवंत गार्डन में देर रात तक समर्थक मौजूद रहे। रिपोर्ट में बताया गया कि कार्यक्रम रात करीब दो बजे तक चला और इस दौरान भाटी ने वाहन की छत पर चढ़कर समर्थकों को संबोधित किया। अब निगाह इस बात पर है कि EWS नियमों में बदलाव की इन मांगों पर सरकार और संबंधित स्तर से क्या कदम उठाया जाता है। खास तौर पर पश्चिमी राजस्थान की कृषि और भौगोलिक परिस्थितियों को EWS पात्रता के मानकों में शामिल करने की मांग आगे किस रूप में सामने आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।



