Thursday, August 20, 2026
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हरिद्वार में बारिश के बीच वन्यजीवों की दस्तक, कहीं तेंदुआ तो कहीं मगरमच्छ-अजगर से दहशत

हरिद्वार में मॉनसून की भारी बारिश के बीच तेंदुआ, मगरमच्छ और अजगर आबादी वाले इलाकों में दिखाई देने से लोगों में दहशत है। वन विभाग की टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान चलाकर वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।

हरिद्वार। हरिद्वार में मॉनसून की भारी बारिश के बीच जंगली जानवरों के आबादी वाले इलाकों में पहुंचने की घटनाएं बढ़ गई हैं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेंदुआ, मगरमच्छ और अजगर दिखाई देने से लोगों में डर का माहौल है। वन विभाग की टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान चलाकर इन वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।

गंगा से निकलकर आबादी में पहुंचा मगरमच्छ

हरिद्वार के जगजीतपुर इलाके में गंगा नदी से निकलकर एक मगरमच्छ आबादी क्षेत्र में पहुंच गया। मगरमच्छ को देखकर स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया। रेस्क्यू के बाद उसे वापस गंगा में छोड़ दिया गया। वन विभाग की टीमों के लिए मॉनसून के दौरान ऐसे मामलों से निपटना बड़ी चुनौती बन गया है।

CCTV में कैद हुआ तेंदुआ

हरिद्वार की बिलकेश्वर कॉलोनी में भी तेंदुए की मौजूदगी से लोगों में दहशत फैल गई। रात के समय तेंदुआ कॉलोनी में लगे CCTV कैमरे में कैद हुआ। तेंदुए की तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई। रात के समय लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं और बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

सड़कों और आबादी में निकल रहे अजगर

हरिद्वार के अलग-अलग इलाकों में अजगर निकलने की घटनाएं भी सामने आई हैं। वन विभाग की टीमों ने कई जगहों पर अजगरों को रेस्क्यू कर जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। लगातार हो रही बारिश के कारण सांप और दूसरे वन्यजीव सुरक्षित और सूखे स्थान की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की तरफ आ सकते हैं। ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

बारिश में क्यों बढ़ जाता है मानव-वन्यजीव संघर्ष?

हरिद्वार की भौगोलिक स्थिति इस समस्या को और गंभीर बनाती है। एक तरफ राजाजी नेशनल पार्क और बड़े वन क्षेत्र हैं, जबकि दूसरी तरफ गंगा नदी बहती है। इनके बीच तेजी से विकसित हो रहा शहर बसा हुआ है। मॉनसून के दौरान तेज बारिश, बाढ़ और जलभराव से वन्यजीवों के प्राकृतिक ठिकाने प्रभावित हो सकते हैं। भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में वे आबादी की ओर बढ़ जाते हैं। इसके अलावा वन क्षेत्रों के आसपास तेजी से हो रहा शहरी विस्तार भी मानव और वन्यजीवों के बीच दूरी कम कर रहा है।

वन विभाग अलर्ट, लोगों से सावधानी की अपील

लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखते हुए वन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। किसी भी इलाके में वन्यजीव दिखाई देने की सूचना मिलने पर टीमों को मौके पर भेजकर रेस्क्यू किया जा रहा है। प्रशासन और वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी जंगली जानवर को देखकर उसके पास जाने या उसे घेरने की कोशिश न करें। भीड़ लगाने से भी बचें और तुरंत संबंधित वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। मॉनसून के दौरान वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, इसलिए विशेष रूप से रात के समय सावधानी बरतना जरूरी है।

लोगों में बढ़ी चिंता

तेंदुए, मगरमच्छ और अजगर के आबादी क्षेत्रों में दिखाई देने से स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ गई है। कई लोग रात में अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। हालांकि वन विभाग लगातार रेस्क्यू अभियान चला रहा है, लेकिन शहर के बढ़ते विस्तार और वन क्षेत्रों के नजदीक बढ़ती आबादी के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष आने वाले दिनों में भी चुनौती बना रह सकता है।

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