Thursday, August 20, 2026
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60 साल बाद मिला डिग्री सर्टिफिकेट, पूर्व सीएम जोरमथंगा ने पूरी की अधूरी कहानी

मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री जोरमथंगा को 1966 में बीए पास करने के करीब 60 साल बाद डिग्री प्रमाणपत्र मिला। उस समय भूमिगत आंदोलन से जुड़ने के कारण वह डिग्री नहीं ले सके थे। गुवाहाटी विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने पुराने रिकॉर्ड खंगालकर प्रमाणपत्र खोजा और उन्हें सौंप दिया। यह उनकी छात्र जिंदगी के अधूरे अध्याय के पूरा होने का खास मौका रहा।

आइजोल। मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री और मिजो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष जोरमथंगा को अपनी स्नातक डिग्री का प्रमाणपत्र करीब 60 साल बाद मिला। 82 वर्षीय जोरमथंगा ने 1966 में बीए की परीक्षा पास की थी, लेकिन उस समय मिजोरम में चल रहे उथल-पुथल और अपने भूमिगत जीवन के कारण वह डिग्री प्रमाणपत्र हासिल नहीं कर सके।

1966 में पास की थी बीए की परीक्षा

जोरमथंगा ने मणिपुर के इम्फाल स्थित धनमंजुरी कॉलेज से अंग्रेजी विषय के साथ बीए की पढ़ाई की थी। उन्होंने वर्ष 1966 में परीक्षा द्वितीय श्रेणी से पास की। उस समय कॉलेज गुवाहाटी विश्वविद्यालय से संबद्ध था।

परीक्षा पास करने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। वह मिजो नेशनल फ्रंट से जुड़े और बाद में भूमिगत आंदोलन का हिस्सा बन गए। इसी वजह से वह विश्वविद्यालय जाकर अपनी डिग्री नहीं ले सके।

छह दशक तक विश्वविद्यालय में सुरक्षित रहा प्रमाणपत्र

जोरमथंगा के मुताबिक, वह बाद में अपनी अंकतालिका हासिल करने में सफल रहे, लेकिन डिग्री प्रमाणपत्र विश्वविद्यालय में ही रह गया। समय बीतने के साथ कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच संबद्धता भी बदल गई, जिससे प्रमाणपत्र हासिल करना मुश्किल हो गया।

कुछ साल पहले गुवाहाटी विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों से मुलाकात के दौरान यह पुराना मामला फिर सामने आया। जोरमथंगा ने अपनी अंकतालिका और अन्य दस्तावेज विश्वविद्यालय के अधिकारियों को दिए। इसके बाद पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए और उनका डिग्री प्रमाणपत्र खोज निकाला गया।

60 साल बाद डिग्री हाथ में आने पर खुशी

डिग्री प्रमाणपत्र मिलने के बाद जोरमथंगा ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और प्रोफेसरों का आभार जताया। उन्होंने माना कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि करीब छह दशक बाद उनकी डिग्री उन्हें मिल पाएगी।

विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में प्रमाणित हुआ कि उन्होंने 1966 में ही अपनी स्नातक परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी कर ली थी।

भूमिगत आंदोलन से मुख्यमंत्री तक का सफर

जोरमथंगा का राजनीतिक सफर भी बेहद महत्वपूर्ण रहा है। वह मिजो नेशनल फ्रंट के संस्थापक लालडेंगा के करीबी सहयोगी रहे और लंबे समय तक भूमिगत आंदोलन से जुड़े रहे।

1986 के मिजो शांति समझौते के बाद मिजो नेशनल फ्रंट मुख्यधारा की राजनीति में आया। इसके बाद जोरमथंगा सक्रिय राजनीति में शामिल हुए और आगे चलकर मिजोरम के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने कई कार्यकालों तक राज्य का नेतृत्व किया।

करीब 60 साल बाद मिली उनकी डिग्री ने उनके जीवन के उस अध्याय को पूरा कर दिया, जो 1966 में परीक्षा पास करने के बावजूद अधूरा रह गया था। एक छात्र से भूमिगत आंदोलनकारी और फिर मुख्यमंत्री तक का उनका सफर मिजोरम के राजनीतिक इतिहास से भी गहराई से जुड़ा रहा है।

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