जयपुर, 20 अगस्त। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की। बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नियमित प्रसवपूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी, प्रसव और प्रसव के बाद की देखभाल सहित कई मुद्दों पर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए।
गायत्री राठौड़ ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश में चल रही स्क्रीनिंग, जांच, उपचार और पोषण किट वितरण की गतिविधियों में गंभीरता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप शत-प्रतिशत टीबी रोगियों का उपचार शुरू कराने को कहा। इसके साथ ही नॉट मशीनों का पूरा उपयोग करते हुए स्क्रीनिंग और जांच का दायरा बढ़ाने तथा अभियान में आमजन की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने निक्षय पोर्टल पर प्रतिदिन दर्ज होने वाली रिपोर्ट के आधार पर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों को टीबी रोगियों की पहचान से लेकर उपचार शुरू होने तक की प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने को कहा गया।

कपासन में मातृ मृत्यु मामले पर सख्त रुख
बैठक में पिछले चार दिनों में सामने आए मातृ मृत्यु के मामलों की केसवार समीक्षा की गई। प्रमुख शासन सचिव ने स्पष्ट किया कि मातृ स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में गर्भवती महिला की मृत्यु के मामले में उच्च जोखिम वाले लक्षण होने के बावजूद उचित स्क्रीनिंग नहीं करने और महिला को उच्च जोखिम वाली गर्भवती के रजिस्टर में दर्ज नहीं करने की बात सामने आई।
इस मामले में संबंधित एएनएम और ब्लॉक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं टोंक जिले में एक गर्भवती महिला को महिला चिकित्सालय रेफर किए जाने के बाद हुई मृत्यु के मामले की आवश्यक जांच सोमवार तक पूरी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

अस्पताल भवनों को समय पर शुरू करने पर जोर
बैठक में प्रसव सखी कार्यक्रम और वर्चुअल निगरानी की भी समीक्षा की गई। मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ चिकित्सकों को संबंधित जिलों के चिकित्सकों का मार्गदर्शन और प्रशिक्षण नियमित रूप से जारी रखने के निर्देश दिए गए।
गायत्री राठौड़ ने कहा कि नवनिर्मित चिकित्सालय भवनों का उद्घाटन होने के बाद उनकी सेवाएं वास्तविक रूप से शुरू होना सुनिश्चित किया जाए। जिन स्थानों पर अस्पताल भवनों का शिलान्यास हो चुका है, वहां निर्माण कार्य समय पर शुरू कर निर्धारित अवधि में पूरा करने पर भी जोर दिया गया।
मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. जोगाराम ने रेफरल सेवाओं की समीक्षा करते हुए 104 जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस की उपलब्धता, समय पर रखरखाव और विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने स्वास्थ्य संस्थानों के समय पर खुलने-बंद होने, साफ-सफाई, चिकित्सकों और कर्मचारियों के निर्धारित वर्दी में रहने तथा मरीजों और उनके परिजनों से शालीन व्यवहार करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऑपरेशन थिएटर में उचित विसंक्रमण, जैव चिकित्सा अपशिष्ट के सही निस्तारण, दवाओं की उपलब्धता, उपकरणों की कार्यशीलता, सुरक्षा व्यवस्था और व्यवस्थित पार्किंग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
बैठक में अतिरिक्त मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, निदेशक एड्स डॉ. सुशील परमार सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



