Wednesday, May 20, 2026
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शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में तत्काल युद्धविराम की अपील की, बोले- हालात बेहद नाजुक, बातचीत ही समाधान का रास्ता

शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच युद्ध और शत्रुता तुरंत खत्म करने की अपील की। बीजिंग में व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि क्षेत्र की स्थिति बेहद नाजुक है और बातचीत जारी रहनी चाहिए। दोनों नेताओं ने वैश्विक स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार व्यवस्था पर चिंता जताई। चीन-रूस ने आपसी रणनीतिक सहयोग मजबूत करने और करीब 40 समझौतों पर आगे बढ़ने पर सहमति जताई।

Middle East tension : बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात पर गहरी चिंता जताते हुए सभी प्रकार की शत्रुता तुरंत समाप्त करने की अपील की है। बुधवार को बीजिंग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के साथ हुई अहम बैठक के दौरान शी चिनफिंग ने कहा कि क्षेत्र की स्थिति बेहद “नाजुक मोड़” पर पहुंच चुकी है और अब संघर्ष रोकना पूरी दुनिया के हित में है।

पश्चिम एशिया में जारी लड़ाई को तत्काल रोका जाना चाहिए : जिनपिंग

‘पीपुल्स ग्रेट हॉल’ में पुतिन का स्वागत करते हुए चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र और पूरे पश्चिम एशिया में जारी लड़ाई को तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। शी जिनपिंग ने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, औद्योगिक सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया को इस समय टकराव नहीं, बल्कि शांति और स्थिरता की जरूरत है।

शी जिनपिंग और पुतिन के बीच वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 14-15 मई को चीन यात्रा के कुछ दिनों बाद हुई, जिसमें उन्होंने ईरान-इजराइल संघर्ष, होर्मुज जलडमरूमध्य और द्विपक्षीय व्यापारिक तनावों पर चीनी नेता के साथ व्यापक चर्चा की थी। इस बैठक पर करीब से नजर रखी जा रही है, क्योंकि चीन और रूस दोनों ही ईरान के प्रमुख रणनीतिक साझेदार हैं और उनके ईरान के साथ घनिष्ठ आर्थिक और सैन्य संबंध हैं और वे होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के ईरान के कड़े रुख को प्रभावित कर सकते हैं, जिसने एक बड़ा वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है।

जिनपिंग ने की ट्रंप की नीतियों की आलोचना

शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय स्थिति को ‘अस्थिर और उथल-पुथल भरी’ बताया और ट्रंप की नीतियों की परोक्ष रूप से आलोचना करते हुए कहा कि ‘‘एकपक्षवाद और वर्चस्ववाद फिर से उभर रहे हैं। उन्होंने कहा, फिर भी शांति, विकास और सहयोग लोगों की आकांक्षा बने हुए हैं। चीन-रूस के बीच घनिष्ठ समन्वय का आह्वान करते हुए शी चिनफिंग ने कहा कि दोनों देशों को मिलकर वैश्विक शासन व्यवस्था को ‘‘और अधिक न्यायसंगत तथा तर्कसंगत’’ बनाने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों और विश्व के प्रमुख देशों के रूप में चीन और रूस को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, उच्च गुणवत्ता वाले व्यापक रणनीतिक समन्वय के माध्यम से अपने-अपने देशों के विकास और पुनरुत्थान को आगे बढ़ाना चाहिए, तथा वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और तर्कसंगत बनाने के लिए कार्य करना चाहिए।’

क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन की यात्रा के दौरान लगभग 40 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। पुतिन की चीन की यह 25वीं यात्रा है। उन्होंने शी चिनफिंग को अपना ‘‘प्रिय मित्र’’ बताया और दोनों रणनीतिक साझेदारों के बीच घनिष्ठ समन्वय और सहयोग को रेखांकित किया। रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ के अनुसार, अपने उद्घाटन संबोधन में पुतिन ने कहा, माननीय राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रिय मित्र! यहां एक चीनी कहावत का उपयोग करना उचित होगा: चीन में लोग कहते हैं, ‘एक दिन की दूरी तीन शरद ऋतुओं जितनी लंबी लगती है। उन्होंने कहा, हम वास्तव में आपसे मिलकर बहुत खुश हैं, और हम लगातार व्यक्तिगत रूप से भी तथा अपने सहयोगियों के माध्यम से भी आपसी तालमेल बनाए रखते हैं।

दोनों नेताओं ने 25 वर्ष पहले हस्ताक्षरित चीन-रूस सद्भावना और मैत्रीपूर्ण सहयोग संधि को आगे भी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इससे पहले ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल’ में वार्ता से पहले, शी चिनफिंग ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। औपचारिक स्वागत के बाद द्विपक्षीय वार्ता हुई। मंगलवार रात यहां पहुंचे पुतिन का स्वागत चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने किया। अपनी यात्रा से पहले मंगलवार को दिए गए एक वीडियो संबोधन में पुतिन ने कहा कि रूस-चीन संबंध ‘वास्तव में अभूतपूर्व स्तर’ पर पहुंच गए हैं। ईरान रूस और चीन दोनों का करीबी रणनीतिक साझेदार है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान से 90 प्रतिशत तेल आयात करता है।

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Mukesh Kumar
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