जयपुर। राजस्थान की राजनीति में छात्र नेता शुभम रेवाड़ के आमरण अनशन के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर दिवंगत समाजसेवी और पूर्व विधायक गुरुशरण छाबड़ा को याद किया। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में शुभम रेवाड़ से मुलाकात के दौरान गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलनों के प्रति सरकार का संवेदनशील होना जरूरी है। उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब गुरुशरण छाबड़ा शराबबंदी की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे, तब सरकार ने लगातार संवाद बनाए रखा था, जबकि वर्तमान सरकार छात्रों की मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही है।
गुरुशरण छाबड़ा का नाम फिर क्यों चर्चा में आया?
अशोक गहलोत ने कहा कि गुरुशरण छाबड़ा ने राजस्थान में पूर्ण शराबबंदी और नशा मुक्ति अभियान के लिए कई बार आमरण अनशन किए। उस समय सरकार की ओर से लगातार बातचीत की गई, मंत्रियों को भेजा गया और अनशन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। गहलोत का कहना था कि सरकार का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि आंदोलन कर रहे लोगों की बात सुनना भी है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब बाद में भाजपा सरकार के दौरान गुरुशरण छाबड़ा दोबारा अनशन पर बैठे, तब उन्हें अपेक्षित संवाद और संवेदनशीलता नहीं मिली। गहलोत ने बताया कि वे विपक्ष में रहते हुए भी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनका निधन हो गया।
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शराबबंदी के लिए लंबा संघर्ष
गुरुशरण छाबड़ा राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी के सबसे प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे। उन्होंने वर्षों तक शराबबंदी लागू करने और नशा मुक्त समाज बनाने की मांग को लेकर आंदोलन चलाया। इसके साथ ही वे मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाते रहे।
2 अक्टूबर 2015 को गांधी जयंती के अवसर पर उन्होंने फिर से आमरण अनशन शुरू किया। लगातार कई दिनों तक भोजन त्यागने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया। आखिरकार अनशन के 33वें दिन, 3 नवंबर 2015 को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र 69 वर्ष थी।
राजनीति से जनआंदोलन तक का सफर
गुरुशरण छाबड़ा का राजनीतिक जीवन भी उल्लेखनीय रहा। वर्ष 1977 में वे जनता पार्टी के टिकट पर बीकानेर जिले की सूरतगढ़ विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। सक्रिय राजनीति के बाद उन्होंने सामाजिक सरोकारों को अपना प्रमुख उद्देश्य बनाया और शराबबंदी के लिए जनजागरण अभियान शुरू किया।
उन्होंने वरिष्ठ गांधीवादी नेता गोकुलभाई भट्ट के साथ मिलकर प्रदेशभर में शराबबंदी को लेकर कई आंदोलन किए। उनका मानना था कि शराब सामाजिक और आर्थिक समस्याओं की बड़ी वजह है और इसके खिलाफ जनजागरण जरूरी है।
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छात्र आंदोलन के बीच फिर हुई चर्चा
छात्र नेता शुभम रेवाड़ के अनशन के दौरान गुरुशरण छाबड़ा का नाम सामने आने से एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि लोकतांत्रिक आंदोलनों के प्रति सरकारों का रवैया कैसा होना चाहिए। गहलोत का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव की मांग केवल एक छात्र नेता की नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों से जुड़ा विषय है और सरकार को इस पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए।



