जयपुर। राजस्थान में आवास और शहरी विकास से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भजनलाल शर्मा सरकार नई जन आवास नीति लागू करने की तैयारी में है। खास बात यह है कि इस बार सरकार वर्षों से चली आ रही उस परंपरा को बदल सकती है, जिसके तहत किसी भी नई नीति का मसौदा (ड्राफ्ट) जनता के सुझाव और आपत्तियों के लिए सार्वजनिक किया जाता था।
सूत्रों के अनुसार, नगरीय विकास विभाग फिलहाल प्रस्तावित जन आवास नीति का ड्राफ्ट सार्वजनिक करने के पक्ष में नहीं है। विभाग का तर्क है कि बिल्डर, रियल एस्टेट डेवलपर्स और अन्य संबंधित पक्षों के साथ कई दौर की बैठकों में पहले ही विस्तृत चर्चा हो चुकी है। ऐसे में दोबारा सुझाव और आपत्तियां लेने से नीति को लागू करने में और अधिक समय लग सकता है।
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21 महीने बाद भी अंतिम रूप का इंतजार
नई जन आवास नीति का मसौदा पिछले करीब 21 महीनों से तैयारियों के दौर में है। पहले सरकार और रियल एस्टेट क्षेत्र के बीच विभिन्न प्रावधानों को लेकर सहमति बनाने में समय लगा, वहीं बाद में प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया धीमी पड़ गई। अब सरकार इसे जल्द अंतिम रूप देकर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
यह नीति सीधे तौर पर भूखंड खरीदारों, आवासीय कॉलोनियों, रियल एस्टेट परियोजनाओं, बिल्डरों और शहरी विकास से जुड़ी होने के कारण काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पारदर्शिता और जनभागीदारी पर उठ रहे सवाल
हालांकि ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं करने की चर्चा के बीच कई सवाल भी उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आम नागरिकों, उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों से सुझाव नहीं लिए गए, तो कई व्यावहारिक समस्याएं नीति में शामिल नहीं हो पाएंगी। विशेषज्ञों के अनुसार इससे एकतरफा नीति बनने, भविष्य में कानूनी विवाद बढ़ने, बार-बार संशोधन की आवश्यकता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। साथ ही आम जनता की भागीदारी सीमित रहने की आशंका भी जताई जा रही है।
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डीएलसी दरों को लेकर भी बढ़ा विवाद
इसी बीच प्रदेश में डीएलसी (District Level Committee) दरों में बढ़ोतरी को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि डीएलसी दरें बढ़ने से जमीन, मकान, रजिस्ट्री, स्टांप शुल्क और बैंक ऋण महंगे होंगे, जिससे मध्यम वर्ग और युवाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने सरकार से बढ़ी हुई डीएलसी दरें वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस इस मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी। नई जन आवास नीति को लेकर अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है। यदि नीति बिना सार्वजनिक ड्राफ्ट के लागू होती है तो यह राजस्थान की शहरी विकास नीतियों में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।



