जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर बनी अनिश्चितता अब लगभग समाप्त होती नजर आ रही है। बुधवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग ने अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी। इस रिपोर्ट के साथ ही चुनावी प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण चरण, यानी ओबीसी आरक्षण निर्धारण का रास्ता खुल गया है।
सरकार अब आयोग की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके बाद पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों और सिफारिशों के आधार पर पंचायतों और नगरीय निकायों में ओबीसी आरक्षण का अंतिम स्वरूप तय करेंगे। आरक्षण तय होने के बाद संबंधित वार्डों और सीटों के लिए लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिससे चुनावी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच जाएंगी।
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राज्य सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को तय समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। हाईकोर्ट में प्रस्तुत रोडमैप के अनुसार, 14 अगस्त तक आरक्षण निर्धारण और लॉटरी की प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
रिपोर्ट में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की तस्वीर भी सामने आई
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, राजस्थान में ओबीसी वर्ग की कुल 92 जातियां हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से केवल 11 जातियों तक सीमित रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इन्हीं 11 जातियों के एक हजार से अधिक जनप्रतिनिधि विभिन्न चुनावों में निर्वाचित हुए हैं, जबकि बाकी अधिकांश जातियों की राजनीतिक भागीदारी अपेक्षाकृत काफी कम रही है।
इस विश्लेषण को भविष्य में आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े निर्णयों के लिए भी अहम माना जा रहा है।
74 लाख से अधिक परिवारों का किया गया सर्वे
ओबीसी आयोग के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश मदनलाल भाटी के अनुसार, रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्रदेशभर में बड़े स्तर पर सर्वे कराया गया। आयोग ने करीब 74 लाख 85 हजार ओबीसी परिवारों से संबंधित आंकड़ों का संग्रह और विश्लेषण किया। इसी आधार पर आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी है। यह सर्वे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कराया गया, ताकि पंचायत और निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण कानूनी और तथ्यात्मक आधार पर किया जा सके।
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अब कब हो सकते हैं चुनाव?
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सरकार द्वारा हाईकोर्ट में प्रस्तुत प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, 17 अगस्त 2026 के आसपास नगरीय निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी की जा सकती है। इसके बाद सितंबर के पहले सप्ताह में मतदान होने की संभावना जताई जा रही है। संभावित कार्यक्रम के मुताबिक 6 और 9 सितंबर को अलग-अलग चरणों में मतदान कराया जा सकता है।
यदि सभी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। सरकार की अगली कार्रवाई अब आयोग की सिफारिशों को लागू करने और चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर केंद्रित रहेगी।



