Tuesday, June 30, 2026
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पश्चिम बंगाल विधानसभा ने एंटी-गुंडा और OBC आरक्षण बिल किए पास, अगस्त में पेश होगा UCC बिल

पश्चिम बंगाल विधानसभा ने एंटी-गुंडा कानून और OBC आरक्षण से जुड़े अहम बिलों को मंजूरी दे दी है। वहीं, सरकार अगस्त 2026 में UCC बिल भी पेश करने की तैयारी में है। जानिए नए कानूनों और बड़े बदलावों की पूरी जानकारी।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय से जुड़े चार अहम विधेयकों को मंजूरी दे दी। इनमें एंटी-गुंडा कानून तथा OBC आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल शामिल हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने घोषणा की है कि समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार किया जा रहा है और इसे अगस्त 2026 में विधानसभा में पेश किया जाएगा।

एंटी-गुंडा कानून को मिली मंजूरी

विधानसभा में ‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ को 176 मतों के समर्थन से पारित किया गया। इस कानून के तहत जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त को ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार होगा जिन्हें सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाएगा। आवश्यक परिस्थितियों में ऐसे लोगों को बिना मुकदमे के अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकेगा। इसके अलावा, दंगे या हिंसा के दौरान सरकारी अथवा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। भुगतान नहीं करने की स्थिति में उनकी संपत्ति जब्त कर नीलाम भी की जा सकेगी।

OBC आरक्षण में बड़े बदलाव

विधानसभा ने OBC आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयकों को भी मंजूरी दी।

कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद बिना सर्वे के OBC सूची में शामिल किए गए 113 समुदायों को सूची से हटा दिया गया है। नए सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर 66 समुदायों को OBC सूची में शामिल किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग OBC श्रेणियों को समाप्त कर केवल एक OBC श्रेणी रखी जाएगी। आरक्षण का प्रतिशत 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया गया है। भविष्य में OBC आरक्षण का प्रतिशत राज्य सरकार और पिछड़ा वर्ग आयोग संयुक्त रूप से तय करेंगे, जबकि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा के भीतर रहेगा। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से फर्जी OBC प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी।

अगस्त में पेश होगा UCC बिल

राज्य सरकार ने बताया कि समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रारूप 2 जुलाई को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद अगस्त 2026 में इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। UCC का मसौदा तैयार करने के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। समिति में कानून, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं और इसे एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।

UCC लागू करने वाला चौथा राज्य बन सकता है पश्चिम बंगाल

समान नागरिक संहिता लागू होने पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा।

यदि विधानसभा से यह विधेयक पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल UCC लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन सकता है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम इस दिशा में कदम उठा चुके हैं।

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Mukesh Kumar
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